मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य में अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर बाल विवाह की संभावनाओं को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की गई प्रभावी और समन्वित कार्रवाई के चलते कुल 13 बाल विवाह रोके गए। यह जानकारी राज्य की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने दी।


अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ मुहूर्त माना जाता है, जिसके कारण इस दिन सामूहिक विवाहों के साथ बाल विवाह की घटनाएं भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने पहले से ही सतर्कता बरती। राज्यमंत्री की अध्यक्षता में एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, सभी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और संबंधित तंत्र को सतर्क रहने तथा सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए।


राज्यभर में जिला, तालुका और ग्राम स्तर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आंगनवाड़ी सेविकाएं, ग्राम बाल संरक्षण समितियां और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कीर्तन, पथनाट्य, पदयात्रा, पोस्टर और शपथ कार्यक्रमों के जरिए लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम या लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो ऐसे विवाह कराने पर मंगल कार्यालय मालिक, पुजारी, बैंड पार्टी और परिजनों के खिलाफ 24 घंटे के भीतर मामला दर्ज किया जा सकता है।
रोके गए बाल विवाहों में रायगढ़ में 1, अहिल्यानगर में 5, बुलढाणा में 1, यवतमाल में 2, छत्रपती संभाजीनगर में 1, धाराशिव में 2 और परभणी में 1 मामला शामिल है। यवतमाल जिले में एक मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई है।
इस कार्रवाई से समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ मजबूत संदेश गया है। सरकार ने भविष्य में भी ऐसे अभियान और अधिक प्रभावी तरीके से चलाने का संकल्प व्यक्त किया है।


