■ वैश्विक आयात-निर्यात नीति के संदर्भ में उपाय योजनाओं पर बैठक।
■ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए स्वतंत्र वॉर रूम बनेगा।
मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले माल पर टैरिफ लगाकर कठिनाई खड़ी करने का प्रयास किया है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इन चुनौतियों से भयभीत हुए बिना आगे बढ़ रहा है। “अपने उत्पादों के लिए वैकल्पिक बाज़ार खोजकर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ संकट को अवसर में बदलना चाहिए।”


मुख्यमंत्री. फडणवीस सह्याद्री अतिथि गृह में वैश्विक आयात-निर्यात नीति के संदर्भ में आयोजित उपाय योजनाओं की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य सचिव राजेश कुमार, रक्षा मंत्रालय के मुख्य सलाहकार (सेवानिवृत्त) अपूर्व चंद्रा, मित्रा संस्था के सीईओ प्रवीण सिंह परदेशी, मुख्यमंत्री के निवेश सलाहकार कौस्तुभ धवसे, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव ओ. पी. गुप्ता, राज्य कर एवं जीएसटी आयुक्त आशीष शर्मा, वस्त्र विभाग की प्रधान सचिव अंशु सिन्हा, श्रम विभाग की प्रधान सचिव आई. ए. कुंदन, उद्योग विभाग के सचिव डॉ. पी. अन्बलगन, पर्यावरण सचिव जयश्री भोज, एमआईडीसी के सीईओ पी. वेलरासु, विकास आयुक्त (उद्योग) दीपेंद्र सिंह कुशवाह और आईआईटी मुंबई के अध्यक्ष डॉ. शरद कुमार सराफ उपस्थित थे।


■ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए स्वतंत्र वॉर रूम
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस संकट को अवसर मानकर राज्य के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में अधिक से अधिक सुधार किए जाएँ। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वतंत्र वॉर रूम स्थापित किया जाएगा और हर महीने इसकी समीक्षा होगी।उन्होंने कहा कि राज्य में निजी औद्योगिक पार्कों को प्रोत्साहन दिया जाए। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) को औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर भी औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए स्पष्ट नीति लानी चाहिए, जिसमें छोटे और मध्यम उद्योगों को प्राथमिकता दी जाए। उद्यमियों को तुरंत लाइसेंस उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो ताकि राज्य में औद्योगिक समृद्धि और रोजगार सृजन में वृद्धि हो।
■ उद्योगों के लिए सकारात्मक नीति
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार नए उद्योगों के साथ-साथ वर्तमान उद्योगों के विकास के लिए भी सकारात्मक है। सिंगल विंडो पोर्टल को और सक्षम किया जाए ताकि अनुमति मिलने में विलंब न हो। पाँच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र वाले कृषि-प्रसंस्करण अथवा कृषि-आधारित उद्योगों के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता न हो, इसके लिए व्यवस्था लागू हो।
उन्होंने कहा कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए समय-समय पर कानून में सुधार किए जाते हैं और इन सुधारों को सभी संबंधित तंत्रों तक पहुँचाया जाए। सुधार केवल कागज़ी न होकर वास्तव में उद्योगों के लिए बदलाव लाने वाले हों। शहरों के पास स्थापित होने वाले उद्योगों को मिलने वाली अनुमतियों की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हो। औद्योगिक भूमि मापन की प्रक्रिया तेज़ हो और पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाने वाले उद्योगों पर अतिरिक्त दंड न लगाया जाए।
महाराष्ट्र में किए गए प्रमुख सुधार
देश का पहला राज्य जहाँ उद्योगों को अग्निशमन अनुमति पूरे वर्ष के लिए मिलती है।
उद्योगों के सुसूत्रीकरण हेतु मैत्री अधिनियम 2023 पारित।
बिजली कनेक्शन हेतु मैत्री सिंगल विंडो प्रणाली शुरू।
नए बिजली कनेक्शन के लिए केवल दो दस्तावेज़ आवश्यक।
उद्योगों के भवन निर्माण हेतु बिल्डिंग प्लान मैनेजमेंट सिस्टम लागू।
एमआईडीसी भूखंडों के लिए MILAP पोर्टल (Industrial Land Application and Allotment Portal) कार्यान्वित।
आगामी सुधारऔद्योगिक भूखंडों की उपलब्धता हेतु लैंड बैंक का निर्माण।
भूखंड वितरण प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ होगी।पर्यावरणीय अनुमति 60 दिनों में देने की व्यवस्था।
ज़िला स्तर पर निवेश बढ़ाने के लिए स्वतंत्र तंत्र विकसित किया जाएगा।


