मुंबई वार्ता संवाददाता

मुगलों ने देश के मंदिरों को लूटा, सोमनाथ मंदिर को मोहम्मद गजनवी ने लूटा, लेकिन आज मंदिरों को लूटने वाले अपने ही निकले। भाजपा और उसके सहयोगियों ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को भी नहीं छोड़ा। यह अत्यंत शर्मनाक और आक्रोश पैदा करने वाला मामला है। लेकिन भगवान राम और हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करने वाले भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक भी नेता इस लूट पर बोलने को तैयार नहीं है। यह भगवान श्रीराम को श्रद्धापूर्वक दान देने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं का घोर अपमान है। हिंदुओं का यह अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। श्रद्धालुओं के चढ़ावे पर डाका डालने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।


राम मंदिर में चढ़ावे की लूट पर प्रतिक्रिया देते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में हुई चोरी और धन की हेराफेरी के मामले में जांच के दौरान राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। लेकिन उनके खिलाफ न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस मामले में मुख्य आरोपियों को छोड़कर आठ छोटे कर्मचारियों पर चोरी और साजिश रचने के आरोप में मुकदमे दर्ज किए गए हैं तथा उन्हें गिरफ्तार किया गया है। मुख्य सूत्रधारों को खुला छोड़कर मोदी सरकार “चोर को छोड़, साधु को फांसी” देने का प्रयास कर रही है।
सपकाल ने आगे कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी चंपत राय के सीधे संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैं। लेकिन उन्हें खुला छोड़ दिया गया है, जबकि गिरफ्तार किए गए लोगों में दान की गिनती करने वाले कर्मचारी, गिनती प्रक्रिया के प्रभारी, प्रक्रिया की निगरानी करने वाले सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी तथा चंपत राय के चालक और विश्वस्त रामाशंकर यादव (उर्फ ‘टिन्नू’) शामिल हैं। घोटाले के असली जिम्मेदार खुले घूम रहे हैं और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है। यह “मोदी है तो मुमकिन है” का एक और उदाहरण है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देशभर के अनेक श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोने और चांदी की ईंटें, हीरे-जवाहरात तथा अन्य बहुमूल्य आभूषण चंपत राय को सौंपे थे। अब लोग स्वयं सामने आकर इसकी जानकारी दे रहे हैं। सिंधी समाज ने 200 किलो चांदी की ईंटें दान में दी थीं, लेकिन उन्हें साधारण रसीद तक नहीं दी गई। भगवान राम के नाम पर श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक दिए गए सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपये की नकद राशि, आभूषण, सोने-चांदी की ईंटें, हीरे के हार और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का कोई सार्वजनिक हिसाब ट्रस्ट द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि इस घोटाले का दायरा बहुत बड़ा है। राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकांश ट्रस्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि अब तक इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं को आहत करने वाले इस घोटाले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत अपेक्षाकृत हल्की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। जबकि इस पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए। यदि मोदी सरकार में थोड़ी भी नैतिकता बची है तो उसे तत्काल इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का आदेश देना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को तत्काल ट्रस्ट का पंजीकरण, लेखा-परीक्षण (ऑडिट) रिपोर्ट तथा सभी वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने चाहिए, ऐसी मांग भी महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की।


