मुंबई वार्ता संवाददाता

हिंद महासागर की लहरें जिसे निगल नहीं सकीं, उसे हमारा सिस्टम लगभग मौत के हवाले छोड़ चुका था। लेकिन कहावत है न “जाको राखे साइयां, मार सके न कोई”—इस कहावत को साकार करता हुआ सियाराम नागवंशी नामक नाविक बीच अरबी समुन्द्र से पांच दिन बाद जिंदा लौट आया, स्थानीय मछुवारो के मुताबिक़ अगर उत्तन सागरी पुलिस के सहारे बैठते तो शायद नाविक का पता ही नहीं चलता |लेकिन इस चमत्कार ने पुलिस की संवेदनहीन कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।


2 जनवरी की रात उत्तन के मछुआरे लार्सन रेमंड बाड्या की ‘सिएरा’ नामक नाव मछली पकड़ने अरबी समुद्र में गई थी।रात के अंधेरे में सभी खलाशी सहित जो एक्सट्रा नाविक होते है वो सो रहे थे। इसी दौरान सियाराम नामक एक सब नाविक अरबी समुद्र में गिर गया। करीब तीन नौटिकल मील { यानी ५. ५६ किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद जब नाव पर उसकी कमी महसूस हुई, तब हड़कंप मच गया।अरबी समुंद्र के बीच उसे काफी खोजा गया जब वह नहीं मिला तब इसकी जानकारी बोट के मालिक लार्सन रेमंड बाड्या को दी गई |


बोट मालिक लार्सन ने तुरंत उत्तन सागरी पुलिस थाने का रुख किया। उम्मीद थी कि अरबी समुद्र में गिरे खलाशी की तलाश में तंत्र तुरंत हरकत में आएगा। लेकिन जवाब मिला—“पहले खुद खोजिए, 24 घंटे बाद शिकायत दर्ज करेंगेपुलिस थाना शायद यह भूल गया की उन्हें गुमशुदी की रिपोर्ट नहीं दर्ज करनी थी बल्कि अरबी महासागर की गहराई में एक इंसान को खोजना था |
पुलिस के इस निष्क्रियता के बाद कई मछली पकड़ने वाली नौकाओं के मछुआरे खुद अरबी समुद्र में उतर पड़े। दो से तीन दिन तक लगातार खोजबीन चली, लेकिन सियाराम का कोई अता-पता नहीं चला। हर गुजरता घंटा सियाराम को मौत के करीब ले जाता रहा।अंत में मछुवारो ने सियाराम को गायब समझ कर खोजना बंद कर दिया, मंगलवार रात करीब 1:30 बजे, नाव मालिक के घर का दरवाजा खटका। इतनी रात को कौन आया है सोच कर बोट मालिक ने घर का दरवाजा खोला सामने वही खड़ा था वही सियाराम—जो पांच दिन पहले समुंद की लहरों में गायब हो चुका था और जिसे सिस्टम लगभग मृत मान चुका था।उसे जिंदा देखकर जहां घर में खुशी फूट पड़ी, वहीं आंखें सिस्टम की बेरुखी से नम भी हो गईं।
चमत्कार ने बचाया,सियाराम के मुताबिक़ अरबी समुन्द्र में गिरने के बाद सबसे पहले तो उसने अपने आपको ख़त्म समझ लिया लेकिन वह कहावत है लड़ने वालो हार नहीं होतो ,, जिस इंसान को सिस्टम नहीं मान कर चल रहा था वह गिराने के बाद उसने समुन्द्र में दिखने वाली एक लाइट की तरफ बढ़ना शुरू किया ,बढ़ते बढ़ते सियाराम एक नाव तक पहुंचा | बता दे की कई बड़ी बड़ी बोट अपनी छोटी छोटी नावों को मछली पकड़ने के लिए छोड़ देते है उसमे पहुंचा और भूखा प्यासा उसी नाव में शरण लिया |
पांच दिन बाद वह उसी नाव से बोत के सहारे बाहर आकर देर रात वापस घर आया | लेकिन एक सच्चाई साफ है—अगर उसकी जिंदगी बची है, तो भगवान की वजह से… सिस्टम की वजह से नहीं।यह घटना सिर्फ एक नाविक की घर वापसी नहीं, बल्कि एक खतरनाक सवाल छोड़ गई है—क्या बीच समुंद्र में गायब हुआ व्यक्ति 24 का इन्तजार करे तब पुलिस उसका मामला दर्ज करेगी | तब तक वह समुंद्र में तैरता रहेगा |
इस मामले में मिर्रा भाइंदर वसई विरार के जोन एक के पुलिस उपायुक्त राहुल चव्हाण को संपर्क करने पर उनके सहायक ने फ़ोन उठाया और सागरी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मुकुंद यादव से बात कहा जब मुकुंद यादव को फ़ोन लगाया गया तो वह पुलिस आयुक्त की मीटिंग में थे लेकिन पुलिस उनके ऑर्डली मेजर पवार की हमने ३ तारीख को भोर में सियाराम का मामला दर्ज किया था और ६ तारीख को हमारी बात हुई सियाराम लौट आया है |


