■ २००७ में हुए कमलाकर जामसांडेकर हत्याकांड मामले में जेल में बंद था.
मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

कुख्यात गैंगस्टर अरुण गवली नागपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा हो गया। रिहा होने के बाद वह पुलिस सुरक्षा में नागपुर के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा। वहां से गवली विमान से मुंबई के लिए रवाना हुआ। अंडरवर्ल्ड डॉन और पूर्व विधायक अरुण गवली को १७ साल बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली और मंगलवार को उसे नागपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया।


अरुण गवली को कमलाकर जामसांडेकर हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। २ मार्च २००७ की शाम को शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर दिन का काम खत्म करने के बाद मुंबई के घाटकोपर स्थित अपने घर पर टीवी देख रहे थे। वह असल्फा गांव के रूमानी मंजिल चाली में रहते थे। कमलाकर जामसांडेकर ने अखिल भारतीय सेना के उम्मीदवार अजीत राणे को ३६७ वोटों से हराया था। कमलाकर जामसांडेकर की पत्नी कोमल काम से बाहर गई थीं, उसी समय उनमें से एक व्यक्ति ने अपनी बंदूक से जामसांडेकर पर गोली चला दी। गोलीबारी बहुत करीब से, यानी ‘पॉइंट ब्लैंक रेंज’ से की गई थी।
जामसांडेकर को गोली लगने की बात सुनकर भीड़ जमा हो गई। भीड़ का फायदा उठाकर हमलावर वहां से भाग गए। कमलाकर जामसांडेकर को अस्पताल लाया गया। लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने हत्या की जांच शुरू की। हालांकि, पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था। पुलिस गहन जांच कर रही थी। तभी उन्हें अहसास हुआ कि इन हत्याओं की कड़ी एक विधायक तक पहुंच गई है। बेशक, यह डॉन अरुण गवली था। इसलिए इस मामले में अरुण गवली को गिरफ्तार कर लिया गया। उस समय अरुण गवली भायखला विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे।
मुंबई पुलिस को मिले सबूतों के अनुसार, अरुण गवली को कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के लिए ३० लाख रुपये दिए गए थे। अरुण गवली ने सदाशिव सुर्वे और साहेबराव भिंटाडे को सुपारी दी थी। ये दोनों दगड़ी चाल में आए थे। उन्होंने दगड़ी चाल में ही अरुण गवली से ३० लाख रुपये लिए थे। इस मामले में अरुण गवली १७ साल जेल में रहा था। अब वह ज़मानत पर रिहा हो गया है।


