आदित्य ठाकरे का ‘दिमागी नक्सलियों’ से संवाद बढ़ा है क्या? गणेशोत्सव के मुद्दे पर आशिष शेलार का सीधा सवाल।

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मुंबई वार्ता संवाददाता


गणेशमूर्ति बनाने से लेकर विसर्जन, गणेशोत्सव की सजावट, रोशनी और विभिन्न परंपराओं पर लगातार आपत्तियां उठाकर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करने वाली प्रवृत्तियों से मुंबईकरों को सावधान रहना चाहिए। क्या ऐसी प्रवृत्तियों को मंत्री आशिष शेलार ने ‘दिमागी नक्सली’ बताते हुए सवाल किया कि आदित्य ठाकरे का इन लोगों से संवाद बढ़ गया है? भाजपा नेता और मंत्री एडवोकेट आशिष शेलार ने शुक्रवार को पत्रकार परिषद में यह सवाल उठाया।


पीओपी गणेशमूर्तियों के विसर्जन को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा 24 जुलाई 2025 को दिए गए निर्देशों को बरकरार रखने के फैसले का शेलार ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे गणेशोत्सव को लेकर बना भ्रम दूर हो गया है और राज्य सरकार के रुख को न्यायिक समर्थन मिला है। शेलार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी आभार जताया।


उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में गणेशोत्सव महासंघ, मूर्तिकार संगठन, उत्सव समितियां, समन्वय समितियां और गणेश मंडलों ने एकजुट होकर भूमिका निभाई है।

■ गणेशोत्सव पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश का आरोप


शेलार ने कहा कि गणेशमूर्ति को कौन सा रंग दिया जाए, मूर्ति का विसर्जन किस तरह हो, मूर्ति पर्यावरण के लिए कितनी नुकसानदायक है, उत्सव के दौरान रोशनी और सजावट कैसी होनी चाहिए—इन मुद्दों पर लगातार आपत्तियां उठाई जा रही हैं। इन आपत्तियों के आधार पर अदालतों में दावे दाखिल किए जाते हैं।


उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह समझने की जरूरत है कि गणेशमूर्ति बनाने, उसके प्रदर्शन और बिक्री, सजावट, उत्सव मनाने तथा विसर्जन पर कानूनी पाबंदियां लगाने का प्रयास कौन कर रहा है।
शेलार ने दावा किया कि भाजपा वर्ष 2013 से गणेश भक्तों, मूर्तिकारों और गणेशोत्सव मंडलों के मुद्दों के लिए लड़ रही है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर गणेशोत्सव की परंपरा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

■ आदित्य ठाकरे से शेलार के तीखे सवाल


आदित्य ठाकरे पर निशाना साधते हुए शेलार ने कहा कि 2018 में मुंबई महानगरपालिका में गणेशमूर्तिकारों के बीच विभाजन की भूमिका सबसे पहले आदित्य ठाकरे ने ली थी। उन्होंने सवाल किया कि शाडू मिट्टी और पीओपी की मूर्तियों के बीच भेद करने के पीछे क्या कारण था?


शेलार ने पूछा कि क्या आदित्य ठाकरे को लालबागचा राजा, चिंचपोकलीचा चिंतामणि और मुंबई की अन्य पारंपरिक गणेशमूर्तियों के निर्माण की पद्धति और उनकी परंपरा की जानकारी है?


उन्होंने आगे सवाल किया कि जिन लोगों ने इन मूर्तियों के विसर्जन के खिलाफ अदालत का रुख किया, उनकी भूमिका के खिलाफ आदित्य ठाकरे ने आवाज क्यों नहीं उठाई? क्या उनका इन प्रवृत्तियों से कोई संबंध है? क्या वे इन लोगों से चर्चा करते हैं? शेलार ने यह भी सवाल किया कि कहीं मुंबई के पारंपरिक और पर्यावरणपूरक गणेशोत्सव में बाधा डालने वालों के साथ उनका कोई संबंध तो नहीं है।


■ उद्धव ठाकरे सरकार के फैसले पर भी निशाना


कोरोना काल के गणेशोत्सव का उल्लेख करते हुए शेलार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना काल में कई गणेशोत्सव मंडलों ने आवश्यक प्रतिबंधों का पालन करते हुए उत्सव मनाया था, लेकिन करीब 100 वर्ष पुरानी परंपरा वाला लालबागचा राजा उस दौरान पहली बार विराजमान नहीं हो सका। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया।


शेलार ने कहा कि गणेशोत्सव समन्वय समिति, महाराष्ट्र के गणेश मंडल और मूर्तिकार इस मुद्दे को लेकर न्यायालयीन लड़ाई लड़ रहे हैं और भाजपा उनके साथ है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा पर्यावरणपूरक और सकारात्मक नीति अपनाने के लिए भी उनका आभार जताया।

■ ‘कांग्रेस का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ’, शेलार का दावा


राहुल गांधी के कार्यक्रम से संबंधित सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर पूछे गए सवाल पर शेलार ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में कांग्रेस से जुड़े व्यक्ति द्वारा लोगों को पैसे देने की पेशकश की जा रही है। शेलार ने महाराष्ट्र पुलिस से इस मामले की जांच की मांग की।


उन्होंने सवाल किया कि कथित तौर पर 25 हजार रुपये कितने लोगों को देने की बात हो रही है और यह पैसा कहां से आ रहा है? क्या यह कांग्रेस कार्यालय या तिलक भवन से आ रहा है अथवा विदेश से आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाले किसी संगठन के माध्यम से आ रहा है? उन्होंने पूरे मामले के आर्थिक स्रोत और संबंधित लोगों या संगठनों के विदेशी संबंधों की भी जांच की मांग की।


■ ‘कांग्रेस देश में अराजकता पैदा करना चाहती है क्या?’


जंतर-मंतर आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के संदर्भ में शेलार ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या कांग्रेस को देश की संवैधानिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।


उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों—आंदोलकारियों और पुलिस—की बात सुनी है तथा मामले में समिति गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं। ऐसे में कांग्रेस को न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।


वंदे मातरम को लेकर जारी राजनीतिक विवाद पर शेलार ने कांग्रेस पर देश में ‘अराजकता’ पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि संसद में कानून बनता है तो उसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वे संसद, सुप्रीम कोर्ट और संविधान से जुड़ी संस्थाओं की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं?


■ ‘गोरेगांव के प्रबोधन पर मोर्चा निकालेंगे क्या?’


बांद्रा पश्चिम के फुटबॉल मैदान को लेकर चल रही न्यायालयीन लड़ाई पर शेलार ने कहा कि अदालत का फैसला आने तक इस विषय पर विस्तार से टिप्पणी नहीं करेंगे। हालांकि, उन्होंने खुले भूखंडों को लेकर आवाज उठाने वालों को चुनौती दी।


शेलार ने सवाल किया कि यदि खुले भूखंडों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है, तो गोरेगांव स्थित ‘प्रबोधन’ के खिलाफ पहला मोर्चा निकाला जाएगा क्या? उन्होंने पूछा कि वह जमीन किसकी है, क्या वह सरकारी जमीन है और वहां निर्माण किसने किया है।


इसके साथ ही उन्होंने दहिसर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की जमीन को लेकर भी सवाल उठाए। शेलार ने कहा कि जमीन का मालिकाना हक किसके पास है और वहां कौन बैठा है, इसका भी जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे इस तरह के कई उदाहरण सामने रख चुके हैं और आने वाले समय में इनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करेंगे।

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