मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान में रह रहे छह फरार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की दिशा में मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में अंतरिम रिपोर्ट पेश की। पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश करने के लिए जारी उद्घोषणा आदेश (Proclamation Order) की प्रक्रिया जारी है और इसे इंटरपोल के माध्यम से आरोपियों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।


विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने अदालत को बताया कि छह फरार आरोपियों के खिलाफ 30 जून को जारी उद्घोषणा आदेश गृह मंत्रालय (MHA) को भेज दिया गया था। गृह मंत्रालय ने 3 अगस्त को आदेश प्राप्त होने की पुष्टि भी कर दी है। अब इस आदेश को आगे इंटरपोल को भेजा जाएगा, ताकि पाकिस्तान में रह रहे आरोपियों तक इसे पहुंचाया जा सके।
अभियोजन पक्ष ने छह फरार आरोपियों के खिलाफ दोबारा उद्घोषणा जारी करने की मांग की थी। यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नए कानून के तहत फरार आरोपियों के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमे की कार्यवाही शुरू करने से पहले आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना जरूरी है।
■ अभियोजन ने मांगा और समय
शुक्रवार को अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि उद्घोषणा आदेश की प्रक्रिया पूरी करने और उसे आरोपियों तक पहुंचाने के लिए उसे कुछ और समय की आवश्यकता है। अदालत ने अब मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। उस दिन अभियोजन पक्ष को उद्घोषणा आदेश की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत फरार आरोपियों के खिलाफ उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने की अनुमति दे सकती है। यदि आरोपी अदालत की ओर से घोषित अपराधी किए जाने के बाद भी जानबूझकर अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं, तो यह माना जा सकता है कि उन्होंने अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के अपने अधिकार को स्वेच्छा से छोड़ दिया है।
इसके बाद अदालत इन आरोपियों का पक्ष रखने के लिए लीगल एड सेल से वकील नियुक्त कर सकती है। इसके पश्चात अभियोजन पक्ष आरोपियों की गैरमौजूदगी में उनके खिलाफ सबूत और गवाह पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
इस मामले में अदालत द्वारा तय की गई अगली तारीख अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि 14 सितंबर को पेश होने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि छह फरार आरोपियों के खिलाफ उद्घोषणा की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची है और उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा शुरू करने की दिशा में आगे की कानूनी कार्रवाई कब संभव होगी।


