आरे के इको-सेंसिटिव जोन में अवैध डंपिंग से पर्यावरण पर खतरा, 6-7 डंपर मलबा मिलने के बाद FIR।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

आरे मिल्क कॉलोनी के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) में निर्माण मलबा, कचरा और मिट्टी की अवैध डंपिंग का मामला सामने आया है। जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड (JVLR) से सटे सरकारी भूखंड पर करीब छह से सात डंपर भरकर मलबा डाले जाने का खुलासा हुआ है। मामले में प्रशासन ने सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


जानकारी के मुताबिक, 30 जून को सुबह करीब 11.30 बजे आरे मिल्क कॉलोनी के सहायक सुरक्षा अधिकारी विजय भागोजी वाघ और उनकी टीम गश्त के दौरान मौके पर पहुंची। वहां सरकारी जमीन पर बड़ी मात्रा में निर्माण मलबा, कचरा और मिट्टी डंप की गई थी। इसके बाद आरे मिल्क कॉलोनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीकांत शिरपुरकर ने स्थल का निरीक्षण कराया और दो स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पंचनामा किया।


प्रशासन के निर्देश के बाद 10 अगस्त को आरे मिल्क कॉलोनी पुलिस थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 329(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बिना अनुमति सरकारी जमीन पर मलबा लाने और डंप करने वाले लोग कौन हैं।

■ पर्यावरण पर गंभीर असर


पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, इको-सेंसिटिव क्षेत्र में इस तरह मलबा डालने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और प्राकृतिक वनस्पति के विकास में बाधा आती है। बारिश के दौरान मलबे से सीमेंट, रसायन और अन्य प्रदूषक बहकर नालों तथा जलस्रोतों तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा प्राकृतिक जल निकासी बाधित होने से जलभराव और बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।
मलबे की लगातार डंपिंग से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन पर भी असर पड़ने की आशंका है। इससे जंगली जानवरों के मानव बस्तियों की ओर आने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।


पर्यावरण कार्यकर्ता और वनशक्ति NGO से जुड़े स्टालिन डी. ने आरे में डंपरों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी की मांग की है। उन्होंने डंपरों की आवाजाही रोकने के लिए समय-सीमा तय करने, प्रमुख स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने और अवैध डंपिंग की जानकारी देने वालों को प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया है।


यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब आरे में अवैध निर्माण और मलबा डंपिंग के खिलाफ प्रशासन पहले से कार्रवाई तेज कर रहा है। अगस्त की शुरुआत में आरे के CEO ने बताया था कि मार्च से अब तक 350 से अधिक अनधिकृत ढांचों को गिराया गया है और अवैध निर्माण तथा अन्य गतिविधियों के खिलाफ कई FIR दर्ज की गई हैं।

प्रशासन के अनुसार, आरे में अवैध मलबा डंपिंग पर रोक लगाने के लिए वन विभाग, बीएमसी, पुलिस और आरे प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है।


मुंबई के इस महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र में अवैध डंपिंग की घटना ने एक बार फिर आरे के इको-सेंसिटिव जोन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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