■ गुरुवार को सर्वार्थ सिद्धि योग में की जाएगी कलश स्थापना।
■ शुक्रवार 4 जुलाई को हाथी पर सवार होकर करेंगी प्रस्थान।
वरिष्ठ संवाददाता /मुंबई वार्ता

शक्ति की उपासना का पर्व नवरात्र साल में 4 बार नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इसमें से 2 गुप्त नवरात्रि और 2 बार प्रत्यक्ष नवरात्रि होती है। साल की पहली गुप्त नवरात्रि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से तो दूसरी गुप्त नवरात्रि माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है। जबकि पहली प्रत्यक्ष नवरात्रि चैत्र माह में और दूसरी आश्विन माह में मनाई जाती है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ी गुप्त नवरात्र आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गुरुवार 26 जून से शुरू हो रही है जो शुक्रवार 4 जुलाई को पूर्णाहुति के साथ समाप्त होगी। आषाढ़ी गुप्त नवरात्र में साधको तथा तांत्रिकों द्वारा कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा की जाती है। साथ ही विशेष रूप से तांत्रिक उपासना, मां बगलामुखी उपासना के साथ दस विद्याओं की पूजा की जाती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 2 शुभ योग में होगी। गुप्त नवरात्रि के पहले दिन ध्रुव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 8:46 बजे से अगले दिन 27 जून को सुबह 5:25 मिनट तक है, इस योग में किए गए कार्य सफल होते हैं। ध्रुव योग प्रात:काल से रात 11:40 बजे तक है, उसके बाद से व्याघात योग होगा। इस दिन आर्द्रा नक्षत्र प्रात:काल से सुबह 8:46 बजे तक है, उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र है।
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की सवारीदेवी पुराण के अनुसार जिस दिन कलश स्थापना होती है, उसी दिन के अनुसार माता की सवारी तय होती है। इस साल 26 जून गुरुवार को घटस्थापना होगी। अतः इस गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा पालकी (डोली) पर सवार होकर धरती पर आएंगी। देवी पुराण के अनुसार-शशि सूर्य गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥ अर्थात सोमवार या रविवार को नवरात्र की शुरुआत होती है तो माता हाथी पर आती हैं। मंगलवार या शनिवार को नवरात्र की शुरुआत होने पर माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं।
गुरुवार और शुक्रवार को शुरू हो तो डोली या पालकी पर आती हैं। बुधवार के दिन नवरात्र की शुरुआत होने पर माता नौका पर सवार होकर आती हैं।इस वर्ष शुक्रवार 4 जुलाई को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का समापन हो रहा है। शुक्रवार के दिन नवरात्रि का समापन होता है तो मां हाथी पर सवार होकर वापस जाती हैं। हाथी पर सवार होकर माता का जाना बारिश और बाढ़ आने का संकेत है। गुप्त नवरात्र में दुर्गा की 10 महाविद्याओं की पूजा गुप्त तरीके से की जाती है। तंत्र-मंत्र साधना के लिए गुप्त नवरात्र सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। देवी पुराण के अनुसार नवरात्रि में माता का पालकी से धरती पर आना शुभ नहीं होता है। यह आने वाले समय में (अगली नवरात्रि से पहले) महामारी, संक्रामक बीमारी, प्राकृतिक आपदा, युद्ध जैसी स्थिति आने का संकेत होता है।
इससे अर्थव्यवस्था में गिरावट, मंदी आने का संकेत भी मिलता है। साथ ही देश दुनिया में हिंसा, अग्निकांड आदि की घटनाएं बढ़ सकती है।आषाढ़ नवरात्रि की शुरुआत पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा बुधवार 25 जून को शाम 4:00 बजे से प्रारंभ होगी। प्रतिपदा तिथि समापन गुरुवार 26 जून को दोपहर 1:24 बजे होगा। उदया तिथि की मान्यता में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 26 जून से शुरू होगी। घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर, द्वि-स्वभाव मिथुन लग्न के दौरान घटस्थापना करना उत्तम होता है। मिथुन लग्न 26 जून सुबह 5:35 बजे से प्रारंभ होगा और इसका समापन 26 जून को सुबह 7:07 बजे होगा। इस तरह घटस्थापना मुहूर्त सुबह 5:35 बजे से सुबह 7:07 बजे तक है। 1 घंटा 32 मिनटके बीच घटस्थापना किया जा सकता है।
इसके अलावा 26 जून को अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:02 बजे से दोपहर 12:57 बजे तकघट स्थापना की जा सकती है। तिथियों के अनुसार देवी पूजन26 जून (गुरुवार): प्रतिपदा-घटस्थापना, मां शैलपुत्री27 जून (शुक्रवार): द्वितीया-मां ब्रह्मचारिणी28 जून (शनिवार): तृतीया-मां चंद्रघंटा29 जून (रविवार): चतुर्थी-मां कूष्मांडा30 जून (सोमवार): पंचमी-मां स्कंदमाता1 जुलाई (मंगलवार): षष्ठी-मां कात्यायनी2 जुलाई (बुधवार): सप्तमी-मां कालरात्रि3 जुलाई (गुरुवार): अष्टमी-मां महागौरी4 जुलाई (शुक्रवार): नवमी-मां सिद्धिदात्री, हवन और नवमी पूजन


