मुंबई वार्ता संवाददाता

EpsteinFiles में हुए खुलासे और इस मामले से प्रधानमंत्री का नाम जुड़ना भारत के लिए अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। इन खुलासों के कारण भारत सरकार की अंतरराष्ट्रीय छवि धूमिल हुई है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तत्काल इस्तीफ़ा देना चाहिए, यह मांग मुंबई यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष ज़ीनत शबरीन ने की है।


EpsteinFiles प्रकरण में प्रधानमंत्री से जुड़े खुलासों के कारण देश की वैश्विक छवि को पहुँची क्षति के विरोध में मुंबई यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष ज़ीनत शबरीन के नेतृत्व में मुंबई में तीव्र विरोध प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर मुंबई यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष हुसैन शेख, पंकज चौधरी, महासचिव अब्दुल समद, अजय मिश्रा, अमनदीप सैनी, तेजस चांदुरकर, दक्षिण मुंबई यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष शेखर जगताप, दक्षिण मध्य मुंबई यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष फरहान मंसूरी सहित यूथ कांग्रेस के सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। प्रदर्शन के दौरान मोदी सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाज़ी की गई।


इस अवसर पर बोलते हुए ज़ीनत शबरीन ने कहा कि क्या एपस्टीन प्रकरण का इस्तेमाल भारत की नीतियों पर दबाव बनाने के लिए किया गया? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी व्यक्तिगत छवि और राजनीतिक अस्तित्व के लिए देश के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों से समझौता कर रहे हैं? यह केवल आरोप नहीं है। यदि निर्णय स्वतंत्र, संस्थागत और राष्ट्रीय हित में लिए गए हैं, तो सरकार को तुरंत स्पष्ट करना चाहिए कि विदेश नीति, ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े निर्णय किस आधार पर, किस प्रक्रिया से और किसके लाभ के लिए लिए गए।
EpsteinFiles से सामने आए तथ्यों के कारण भारत सरकार की कार्यप्रणाली, उसकी विदेश नीति और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं में एक कुख्यात अंतरराष्ट्रीय अपराधी की भूमिका का उल्लेख, तथा अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान तक पहुँच के लिए निजी उद्योगपतियों की भूमिका, राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और संस्थागत कूटनीति पर सीधा हमला है।इन खुलासों की पृष्ठभूमि में सरकार के हालिया नीतिगत निर्णय और अधिक संदिग्ध प्रतीत होते हैं, ऐसा शबरीन ने कहा।
रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह परियोजना को कमजोर करना, रूस से मिलने वाले सस्ते ऊर्जा विकल्पों से पीछे हटना और भारत की ऊर्जा नीति को अमेरिकी हितों के अनुरूप ढालना—ये सभी फैसले राष्ट्रीय हितों की बजाय बाहरी दबाव की ओर संकेत करते हैं।ऐसी स्थिति में इन सभी मुद्दों पर पूर्ण और पारदर्शी स्पष्टीकरण दिया जाना अत्यंत आवश्यक है, यह भी ज़ीनत शबरीन ने स्पष्ट किया।


