मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आई हैं। चुनाव विभाग के अनुसार राज्य में कुल 1,22,24,007 मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इनमें 62,48,281 मतदाताओं के रिकॉर्ड का पुराने रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया, जबकि 59,75,726 मतदाताओं के रिकॉर्ड का मिलान तो हुआ, लेकिन उनमें कुछ विसंगतियां पाई गईं।


मुंबई उपनगर में सबसे ज्यादा मामले
31 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुंबई उपनगर जिले में 16,39,628 मतदाता नोटिस की श्रेणी में आए हैं। इनमें 10.77 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो सका, जबकि करीब 5.63 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में मिलान के बावजूद विसंगतियां पाई गई हैं।
वहीं, मुंबई शहर में 4,58,545 मतदाता इस श्रेणी में हैं। इनमें करीब 3.17 लाख रिकॉर्ड का मिलान नहीं हुआ, जबकि 1.41 लाख रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गई हैं।
ठाणे और पुणे भी प्रभावित
नोटिस के मामले में मुंबई उपनगर के बाद पुणे में 13,34,165 और ठाणे में 13,17,184 मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा नागपुर में 8,66,138 और नासिक में 7,34,788 मतदाताओं को नोटिस श्रेणी में रखा गया है।
नोटिस का उद्देश्य क्या है?
चुनाव आयोग के अनुसार, नोटिस जारी करने का उद्देश्य किसी मतदाता का नाम सीधे हटाना नहीं है। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड का मिलान नहीं हुआ है या जिनके रिकॉर्ड में विसंगतियां मिली हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया के माध्यम से रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को सत्यापित करना और उसमें मौजूद विसंगतियों को दूर करना है। चुनाव विभाग ने संकेत दिया है कि नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को स्पष्ट किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में मुंबई उपनगर सबसे अधिक प्रभावित जिला बनकर सामने आया है, जहां 16.39 लाख से अधिक मतदाता नोटिस श्रेणी में हैं।


