किडनी बहुत कीमती है!

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डॉ धीरज फूलमती सिंह/ स्तम्भकार/मुंबई वार्ता

क्या आप जानते हैं डायलिसिस के दौरान, खून को लाल वाली ट्यूब से बाहर निकाला जाता है , फिर डायलिसिस मशीन से वो खून गुजरता है, और फिर नीली ट्यूब से उसे वापस शरीर में डाला जाता है।जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती हैं, तो डायलिसिस शरीर को सामान्य रूप से काम करने में मदद करने के लिए रक्त को फ़िल्टर करने का काम करती है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में तकरीबन तीन-चार घंटे लगते हैं और इस दौरान मरीज बिना हिले डूले बेड पर पडा रहता है.!

ये प्रकिया हफ़्ते में दो या तीन बार दोहराई जाती है, इसका मतलब एक महीने में तकरीबन 12 बार और हर बार यह प्रकिया तीन से चार घंटे लेती है। इसका मतलब लगभग अड़तालीस घंटे हर सप्ताह …!

जो लोग किडनी के किसी रोग से त्रस्त नहीं हैं,किडनी रोग से ग्रस्त नही है यानि जो बिल्कुल स्वस्थ लोग हैं उनके लिए उनकी किडनी यह काम बिना किसी परेशानी और बाधा के दिन में छत्तीस बार करती है! अगर आप मेरी इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं तो मेरी बात को समझिये! आज अभी से शराब पीना छोड़िए, बेमतलब की एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवा लेने से परहेज किजिए,नमक का सेवन कम से कम किजिए,प्रोसेस्ड फ़ूड से नाक पकड लिजिए,जंक फूड और फ़्राई खाने से तौबा कर लिजिए। अनावश्यक रूप से मीठा ख़ाना बिल्कुल ही बंद कर दिजिए।

मेरठ,दिल्ली,गुड़गांव और आप पास के लोगों में मीठा खाने की लत और तलब बहुत होती है। तो युवा और कामकाजी पीढी तले हुए फास्ट फूड और जंक फूड बहुत खाती है। भारत के मैदानी इलाको के लोग अपने खाने में नमक का उपयोग बहुत करते है।ध्यान रखे,किडनी कभी अचानक से खराब नही होती है,किडनी के खराब होने की प्रकिया बहुत धीमी पर खतरनाक होती है। उच्च रक्तचाप को भी नियत्रंण में रखना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों को भी बहुत संभल कर रहना चाहिए। डायबिटीज मरीजो में किडनी फेल होने की दर लगभग 15% है।

किडनी फेल होने की जानकारी मरीज को बहुत देर बाद में पता चलती है,तब तक बहुत देर बहुत देर हो चुकी होती है। मौत के रास्ते से वापस लौटने का कोई जरिया नही होता है। एक बार यह खराब हो गई तो फिर ठीक नही होती है। मरीज को जिदा रखने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही इसका अंतिम और इकलौता उपाय है पर यह भी सौ प्रतिशत कारगर और सुरक्षित नही है। डायलिसिस तो जैसे खटारा गाडी को धक्का देकर आगे सरकाने जैसी क्रिया है।

धक्का देने से न गाड़ी तेज चलती है,न अपने मन से चलती है। सर्विसिंग करने के बाद भी खटारा गाडी सिर्फ खटारा ही होती है। डायलिसिस धक्का और सर्विस का मिला जुला रूप है।हर साल भारत में दो लाख तो दुनिया-भर में 25 लाख लोग किडनी फेल्योर से मर जाते है। भारत में पिछले 15 सालों में किडनी के मरीजो की संख्या दोगुनी से अधिक हुई है। अगले छः सालों में यह संख्या तीन गुनी होने जा रही है। आप उनमे से एक न हो,इस बात की सावधानी रखे।

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