कैदी की कोठरी में मृत्यु के मामले में मुआवजे की नीति तय।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य के कारागृहों में कोठरी में बंद कैदी की मृत्यु अगर अस्वाभाविक कारणों से होती है, तो उसके वारिसों को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सिफारिश के अनुसार मुआवजा देने की नीति को आज हुई मंत्रिमंडल बैठक में मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की।

इस नीति के अनुसार, यदि कारागृह में काम करते हुए कोई दुर्घटना होती है, चिकित्सा अधिकारियों की लापरवाही से, कारागृह कर्मचारियों द्वारा पिटाई के कारण या कैदियों के बीच झगड़े में मृत्यु होती है और संबंधित मामले में प्रशासन की लापरवाही की जांच से साबित होती है, तो कैदी के वारिसों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

जेल में आत्महत्या के मामलों में कैदी के वारिसों को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।राज्य के सभी कारागृहों में यह नीति लागू रहेगी। यदि कैदी की मृत्यु वृद्धावस्था, लंबी बीमारी, कारागृह से भागने की कोशिश के दौरान, जमानत पर रहते हुए, या इलाज न मिलने के कारण होती है, तो किसी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

प्राकृतिक आपदाओं के कारण मृत्यु होने पर, मौजूदा सरकारी नीति के अनुसार मुआवजा मिलेगा।मुआवजे के लिए संबंधित कारागृह अधीक्षक को प्रारंभिक जांच, शव परीक्षण, पंचनामा, चिकित्सा रिपोर्ट, न्यायिक और जिला कलेक्टर की जांच जैसी कागजातों के साथ रिपोर्ट क्षेत्रीय विभाग प्रमुख के पास भेजनी होगी। इसके बाद मामले की गहन जांच कर अंतिम प्रस्ताव अपर पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक, कारागृह और सुधार सेवा, महाराष्ट्र राज्य, पुणे के पास भेजा जाएगा। उनकी सिफारिशों के बाद सरकार स्तर पर निर्णय लिया जाएगा और मुआवजा दिया जाएगा।

मृत्यु के मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मंजूरी दी गई है।

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