मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

राज्य में गन्ना पेराई का सीजन ज़ोरों पर होने के बीच कोऑपरेटिव चीनी फैक्ट्रियों में लिए गए लोन के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनसीडीसी) से लोन लेने वाली 32 कोऑपरेटिव चीनी फैक्ट्रियों में से केवल 6 फैक्ट्रियों ने ही नियमों के मुताबिक धनराशि का उपयोग किया है, जबकि शेष 26 फैक्ट्रियों में अनियमितताएं पाई गई हैं।


इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के कोऑपरेशन विभाग ने मंगलवार को एक सरकारी फैसला (जीआर) जारी किया है। इसके तहत लोन के उपयोग में नियमों का उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों की जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित की गई है। कमेटी अपनी जांच पूरी करने के बाद एनसीडीसी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।राज्य सरकार को एनसीडीसी की ओर से पहले ही यह जानकारी दी गई थी कि लोन की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है और इस पर की गई कार्रवाई से कॉर्पोरेशन को अवगत कराया जाए।


कोऑपरेटिव चीनी फैक्ट्रियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से एनसीडीसी ने राज्य की 32 फैक्ट्रियों को वर्किंग कैपिटल (मार्जिन मनी) की आवश्यकता पूरी करने के लिए कुल 4,355.12 करोड़ रुपये का लोन प्रदान किया था।जांच में सामने आया है कि इनमें से 21 फैक्ट्रियों ने लोन के उपयोग में गंभीर उल्लंघन किए हैं, जबकि 3 फैक्ट्रियों में आंशिक अनियमितताएं पाई गई हैं। वहीं केवल 6 फैक्ट्रियों ने लोन की शर्तों के अनुसार राशि का सही उपयोग किया है।
कोऑपरेशन मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने बताया कि एनसीडीसी से लिए गए लोन के दुरुपयोग को लेकर संबंधित फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया जाएगा और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।


