● आर्थिक मदद न देने पर सरकार से जवाब तलब
मुंबई वार्ता संवाददाता

कोरोना की दूसरी लहर में अपना इकलौता कमाऊ बेटा खोने के करीब पाँच साल बाद 63 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यक्ति की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। अदालत ने बेटे की मौत की परिस्थितियों को लेकर उठाए गए सवालों पर याचिकाकर्ता की शिकायतों के निपटारे और अब तक आर्थिक सहायता क्यों नहीं दी गई, इसकी जांच के आदेश राज्य सरकार को दिए हैं।


न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने रमाशंकर शालिग्राम यादव द्वारा वर्ष 2021 में दायर याचिका पर हाल ही में सुनवाई की। यादव के बेटे सुनीलकुमार यादव (41) की मई 2021 में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित जंबो कोविड सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।याचिकाकर्ता ने अपने बेटे की मृत्यु की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए कोरोना पीड़ितों के परिजनों के लिए घोषित अनुग्रह मुआवजा और अन्य सरकारी लाभ देने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चार-पाँच साल बाद मौत के कारणों की दोबारा जांच कराने को लेकर संदेह जताया। अदालत ने कहा कि जांच रिपोर्ट, अस्पताल के दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध हैं, जिनमें मरीज के लक्षण स्पष्ट रूप से कोरोना से संबंधित बताए गए हैं। ऐसे में इस स्तर पर नई जांच से कोई ठोस निष्कर्ष निकलने की संभावना नहीं है।
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की शिकायतों का उचित समाधान किया जाना चाहिए और यह जांच जरूरी है कि अब तक अनुग्रह राशि और अन्य सरकारी लाभ क्यों नहीं दिए गए। इसी संबंध में राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई और जांच के निर्देश दिए गए हैं।


