■ मुंबईकरों होशियार हो जाओ! देवनार डंपिंग ग्राउंड पर कमीशनखोर गिद्धों की मंडली मंडरा रही है:- आशीष शेलार
मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार के आरोपों के अनुसार आदित्य ठाकरे की पार्टी ने मुंबई के देवनार डंपिंग ग्राउंड के कचरा सफाई के नाम पर हज़ारों करोड़ की कमिशनखोरी की है। इन आरोपों को जानने के बाद मुंबईकरो के सामने सवाल उठा है कि- कमाई के लिए कचरा तक कि दलाली करने वाले एक फिल्म का माफिया “कचरा सेठ ” क्या असल में आदित्य ठाकरे है ?
“देवनार डंपिंग ग्राउंड के कचरे की सफाई के नाम पर वर्ष 2008 में उबाठा ने सत्ता में रहते हुए रू 4500 करोड़ का ठेका आवंटित कर जमकर कमिशनखोरी की थी। उस समय भी हमने ठेके का विरोध किया था। अब करीब 17 साल बाद जब उसी देवनार डंपिंग ग्राउंड की सफाई का ठेका करीब रू 2000 करोड़ कम में निकाला गया और कमिशन खोरो को कमिशन नहीं मिला तो वे ठेके पर उंगली उठा रहे हैं,” इस प्रकार का आरोप मुंबई भाजपा अध्यक्ष, मंत्री आशीष शेलार ने उबाठा (शिवसेना) पर लगाया है।


आशीष शेलार ने कहा कि, “देवनार डंपिंग ग्राउंड को साफ करने के लिए ₹2,368 करोड़ की लागत की टेंडर नगर निगम ने निकाला और कचरे पर राजनीति करने वाले कुछ गिद्ध, कौए और बगुले तुरंत आरोपों के पंख फैलाकर इस देवनार डंपिंग ग्राउंड पर मंडराने लगे हैं। यही कौए, गिद्ध और बगुले इसी कचरे से कमीशन खाकर पिछले पच्चीस सालों में मोटे-ताजे हो चुके हैं।
उन्होने कहा कि “युवराज” आदित्य ठाकरे इस झुंड के अगुवा बनकर आज जब आरोप लगा रहे हैं, तब conveniently उन्होंने अपनी ही की गई लूटमार को भुला दिया है। इसलिए बता रहा हूँ—
1) सन 2008 में जब आदित्य ठाकरे की सत्ता मुंबई महापालिका में थी, तब देवनार डंपिंग ग्राउंड के कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए ₹4,500 करोड़ की निविदा निकाली गई थी।
2) यह कार्य अब तक पूरा हो जाना चाहिए था।
3) हमने उस समय इस ठेके का विरोध किया था। हमने उस ठेके में मौजूद कई खामियों को उजागर किया था। यह पैसा बर्बाद जाएगा, यह बात हमने तब भी मुंबईकरों के सामने रखी थी।
4) लेकिन हमारे विरोध की परवाह किए बिना, तत्कालीन सत्ताधारियों ने ₹4,500 करोड़ की देवनार डंपिंग ग्राउंड की टेंडर मंजूर की, मोटा कमीशन खा लिया और उसके बाद कुछ नहीं किया।
5) कचरे के ढेर आज भी देवनार में वैसे ही पड़े हैं, दुर्गंध से मुंबईकरों का दम घुट रहा है। दमा और फेफड़ों की बीमारियों से मुंबईकर पिछले 40 सालों से परेशान हैं।
6) देवनार डंपिंग ग्राउंड को वैज्ञानिक पद्धति से बंद करो, नहीं तो मुंबई में नए निर्माण कार्यों पर एक साल की रोक लगाओ — ऐसा कहकर जब तक अदालत ने फटकार नहीं लगाई, तब तक सत्ताधारी बनकर उन्होंने कुछ भी नहीं किया।
7) ₹4,500 करोड़ का ठेका दिया, उसका हिसाब कौन देगा? अब जब निगम कचरा उठाने का नया टेंडर निकालती है, तब भी ये ही लोग चिल्लाते हैं…मुंबईकरों, समझो…जिन्होंने उसी काम के लिए ₹4,500 करोड़ की टेंडर दी, मलाई खाई और चुपचाप निकल गए, वही अब ₹2,368 करोड़ पर शोर मचा रहे हैं कि इतना खर्च क्यों?तो फिर बताओ — उनका ₹4,500 करोड़ बड़ा था या आज का ₹2,368 करोड़?
शेलार ने कहा कि, “जिस धारावी पुनर्विकास प्रकल्प के लिए देवनार की जमीन दी जानी है, उसमें एक इंच भी जमीन अदानी के नाम पर नहीं जाएगी। धारावी प्रोजेक्ट का विकास होते समय मुंबई महानगरपालिका और सरकार को राजस्व मिलेगा, अयोग्य झोपड़पट्टीवासियों को भी घर मिलेगा। खुले मैदान, बगीचे, स्कूल जैसी सुविधाएं मुंबईकरों को मिलेंगी — फिर भी इस प्रकल्प का विरोध आदित्य ठाकरे और उनकी मंडली क्यों कर रही है?


