■ ‘खरगे का अपमान दलित, वंचित, पिछड़े समाज और संविधान का अपमान’; श्रीराम सेना की कार्रवाई की कड़ी निंदा
मुंबई वार्ता संवाददाता

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई सार्वजनिक सभा के बाद श्रीराम सेना द्वारा कथित तौर पर सभा स्थल का ‘शुद्धीकरण’ किए जाने को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड़ ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए शुद्धीकरण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।


वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि किसी राजनीतिक नेता की सभा के बाद उसके स्थल का शुद्धीकरण करना सिर्फ एक नेता का अपमान नहीं, बल्कि संविधान में निहित समानता के मूल्यों का खुला अपमान है। उन्होंने कहा कि देश को आजाद हुए 80 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन यदि आज भी किसी दलित नेता के अपमान के लिए शुद्धीकरण जैसे कर्मकांड किए जा रहे हैं, तो यह केवल किसी एक संगठन की मानसिकता नहीं, बल्कि मनुवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाली सोच का प्रदर्शन है।
उन्होंने मांग की कि सभा स्थल का कथित तौर पर शुद्धीकरण करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि जाति के आधार पर भेदभाव करने वाली मानसिकता को बढ़ावा न मिले।
■‘जाति के आधार पर किसी को शुद्ध-अशुद्ध ठहराने का अधिकार किसने दिया?’
सांसद गायकवाड़ ने कहा कि 8 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे ने एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल इसलिए सभा स्थल का शुद्धीकरण किया गया क्योंकि खरगे एक विशेष समाज से आते हैं?
उन्होंने कहा, “किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर उसे शुद्ध या अशुद्ध ठहराने का अधिकार श्रीराम सेना को किसने दिया?”
वर्षा गायकवाड़ ने भाजपा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भाजपा का इस घटना से कोई संबंध नहीं है, तो जातीय द्वेष का प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए भाजपा सरकार आगे क्यों नहीं आती?
■ ‘भाजपा अपनी भूमिका स्पष्ट करे’
कांग्रेस सांसद ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे का अपमान देश के प्रत्येक दलित, वंचित और संविधान में विश्वास रखने वाले नागरिक का अपमान है। उन्होंने भाजपा से आरोपों को खारिज करने के बजाय जातीय भेदभाव की इस मानसिकता के खिलाफ अपनी स्पष्ट भूमिका सामने रखने की मांग की।
वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और जाति के आधार पर किसी व्यक्ति को कमतर आंकने या भेदभाव करने की मानसिकता को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।


