मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

राज्य में गन्ने के पेराई सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है। मौजूदा सीजन में कुल १९७ फैक्ट्रियों में पेराई चल रही है, जिसमें ९८ कोऑपरेटिव और ९९ प्राइवेट फैक्ट्रियां शामिल हैं। बुधवार, ७ जनवरी तक ५५.३५ लाख टन चीनी का प्रोडक्शन हो चुका है।


राज्य में गन्ने का पेराई सीजन 15 नवंबर से शुरू हुआ था। फैक्ट्रियों की पेराई कैपेसिटी बढ़ गई है। लेबर के साथ मशीन से गन्ने की कटाई चल रही है। १९७ फैक्ट्रियां हर दिन औसतन १० लाख टन की कैपेसिटी से पेराई कर रही हैं। अब तक फैक्ट्रियों ने कुल ६२३.८३ लाख टन गन्ने की पेराई की है। ठंडे मौसम की उम्मीद के कारण, चीनी का अच्छा एक्सट्रैक्शन हो रहा है, और 8.87% चीनी एक्सट्रैक्शन के साथ ५५.३५ लाख टन चीनी का प्रोडक्शन हुआ है।


कोल्हापुर डिवीजन ने १३५ लाख टन गन्ने की पेराई की है और सबसे ज़्यादा १४.१६ लाख टन चीनी का प्रोडक्शन हुआ है। पुणे डिवीजन ने १४५ लाख टन गन्ने की पेराई की है और १३.२७ लाख टन का प्रोडक्शन हुआ है, सोलापुर डिवीजन ने १३६ लाख टन गन्ने की पेराई की है और १०.८५ लाख टन का प्रोडक्शन हुआ है, अहिल्यानगर डिवीजन ने ६.४० लाख टन का प्रोडक्शन हुआ है, छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन ने ४.४९ लाख टन का प्रोडक्शन हुआ है, नांदेड़ डिवीजन ने ५.५२ लाख टन का प्रोडक्शन हुआ है, अमरावती डिवीजन ने ५.६८ लाख टन का प्रोडक्शन हुआ है और नागपुर डिवीजन ने २९ हज़ार टन चीनी का प्रोडक्शन हुआ है।
राज्य की चीनी इंडस्ट्री किसानों, सरकार और इकॉनमी के लिए ज़रूरी है। चीनी इंडस्ट्री बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा करती है। यह मौसम गन्ना किसानों की आय का मुख्य स्रोत है, और चीनी, शराब, इथेनॉल और बिजली के उत्पादन के माध्यम से देश की खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देता है, जिससे यह देश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन जाता है।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य हैं। इन राज्यों की अर्थव्यवस्था में चीनी उद्योग का बड़ा हिस्सा है।


