मुंबई वार्ता/सुरेश मिश्र/कवि

भला सनातन का कसूर क्या, बाबू जी बतलाओगे ।
हिंदू-हिंदू कहकर छूरी, हिंदू पर चलवाओगे?
पहले आरक्षण से काटे, बांटे हिंदू-हिंदू को।
अब *यूजीसी* लागू करके, मारे चाटे हिंदू को।
एससी,एसटी,ओबीसी से, कैसे छांटे हिंदू को ?
अब काला कानून बनाकर, काहें डाटे हिंदू को ।


सत्य सनातन किनके कारण, बचा,तनिक बतलाओगे ?
हिंदू-हिंदू कहकर छूरी, हिंदू पर चलवाओगे?
वोटों की खातिर तुम सबने, संविधान को बेंच दिया ।
कतल योग्यता का करके, यूं स्वाभिमान को बेंच दिया ।
आखिर पाप किए क्या ब्राह्मण,ठाकुर,बनिया,लाला ने ?


परख जहां होती है ऐसे, इम्तिहान को बेंच दिया ।
*यूजीसी* तो लाकर हिंदू, *एक* नहीं कर पाओगे ।
हिंदू-हिंदू कहकर छूरी, हिंदू पर चलवाओगे?
बिना जांच के ही अपराधी, तुमने कैसे मान लिया ?
नहीं शान से जीने दोगे, तुमने मन में ठान लिया ।
तुम भी वही कुटिल वंशज हो,अब हमने पहचान लिया ।
जान लुटाएं हम तुझपे,तू हमें जानवर जान लिया ।
सटक गई जिस दिन सवर्ण की, मिट्टी में मिल जाओगे ।
हिंदू-हिंदू कहकर छूरी, हिंदू पर चलवाओगे?
जिसने तुमको वोट दिया,उस पर तलवार चलाते हो।
अगर बंटे तो कट जाओगे,गीत सुनहरा गाते हो।
खुद ही बांट रहे हो हमको, *यूजीसी* तलवारों से ।
जिसने धिक्कारा तुमको, सब्सीडी वहीं बरसाते हो।
संविधान में समानता का, कैसे पाठ पढ़ाओगे ?
हिंदू-हिंदू कहकर छूरी, हिंदू पर चलवाओगे?
अभी समय है जाग जाइए, वरना पछताना होगा।
हमने सत्ता सौंपी है तो, वापस भी जाना होगा ।
बड़े ध्यान से कान खोलकर, सुन लो ऐ सत्ताधीशों ।
काल न बन जाए *यूजीसी*, होश में अब आना होगा।
सुनो संघ वालों क्या ऐसे, हिंदू राष्ट्र बनाओगे ?
हिंदू-हिंदू कहकर छूरी, हिंदू पर चलवाओगे?


