मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई महानगर के दो सड़क नाम चर्चा में आते ही टीपू सुल्तान मामले पर भाजपा की नौटंकी का पर्दाफाश हो गया है। वजह यह है कि इन दोनों सड़कों का नाम भी टीपू सुल्तान के नाम पर रखा गया है और इसकी पहल भाजपा नगरसेवको ने ही की थी।


पूर्व उपनगरों में एम. पूर्व गोवंडी इलाके में बाजीप्रभु देशपांडे मार्ग से लेकर रफीनगर नाले तक जाने वाले शिवाजी नगर मार्ग क्रमांक-4 का नाम बदलकर ‘शहीद टीपू सुल्तान मार्ग’ रखने का प्रस्ताव 26 जुलाई 2013 को एम. पूर्व प्रभाग समिति में रखा गया था। यह प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी के नगरसेवक विठ्ठल खरटमोल ने पेश किया था। बाद में 27 दिसंबर 2013 को बृहन्मुंबई महानगरपालिका की सर्वसाधारण सभा में यह प्रस्ताव बिना किसी विरोध के मंजूर हो गया।


इस प्रस्ताव के सूचक यशोधर फणसे थे, जबकि तत्कालीन नगरसेवक अमित साटम ने इसका अनुमोदन किया। उस समय आज की महापौर और तत्कालीन नगरसेविका रितू तावडे सहित भाजपा के 21 सदस्य सदन में मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी टीपू सुल्तान के नाम पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई। चूंकि मूल प्रस्ताव भाजपा नगरसेवक की ओर से था, इसलिए इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।
इसी तरह अंधेरी पश्चिम में गिल्बर्ट हिल मार्ग से सी. डी. बर्फीवाला मार्ग के नाके तक जाने वाली सड़क का नाम ‘शेर-ए-मैसूर टीपू सुल्तान मार्ग’ रखने का प्रस्ताव 23 अप्रैल 2001 को महापालिका सभा में लाया गया था। इस प्रस्ताव के भी सूचक विठ्ठल खरटमोल ही थे, जबकि कांग्रेस के मोहसीन हैदर ने इसका समर्थन किया था। उस समय भी सदन में मौजूद भाजपा के 21 नगरसेवकों की उपस्थिति में यह नामकरण एकमत से मंजूर हुआ था।
अब बदलते राजनीतिक और धार्मिक माहौल में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन सड़कों को कभी सर्वसम्मति से टीपू सुल्तान का नाम दिया गया था, क्या उन्हें अब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी रद्द करेगी? या फिर यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक ही सीमित रहेगा—इस पर पूरे मुंबई समेत राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।


