श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

2024 का चुनाव जीतने पर भावी मुख्यमंत्री को बाहों में लेकर झूला झुलाने वाले भाजपा के कथित नेता ‘दंबोज’ की दुकान धीरे-धीरे ‘पैक’ हो रही है।दरअसल वर्ष 2024 में महायुति की सरकार आने के बाद भाजपा नेता ‘दंबोज’ ने मुंबई के बिल्डरों को, कई जमीन मालिकों को, उत्तर प्रदेश स्टाइल में धमका-चमका कर उनकी परियोजनाओं पर कब्जा करना शुरू किया था। गत 2 वर्षों से मुंबई के कई नामी-गिरामी बिल्डर ‘दंबोज’ के दम का बोझ सहन कर रहे थे। लेकिन कहावत है कि ‘ अति सर्वत्र वर्जित:’- अर्थात किसी भी चीज़ की अति वर्जित है और अति होने पर प्रकृति ही इंतजाम करती है। ऐसा ही कुछ हुआ है ‘दंबोज’ के साथ ही।


■ दंबोज का दम करने की वज़ह
अपनी दम देने की आदत के अंतर्गत दंबोज ने बांद्रा के पाली हिल इलाके में रहने वाली एक इसराईली महिला के बंगले को डरा-धमका कर खाली करवा लिया। भुगतान के नाम पर थोड़ा- बहुत रुपया दिया और बाकी राजनीतिक पहुंच की धमकी दी। इसराईली होने के कारण उक्त महिला ने भी यहां कुछ करने की बजाय चुपचाप बंगला दंबोज के हवाले कर अपने देश चली गई। इधर दंबोज भी अपनी रसूख के नशे में खो गया। उक्त इसराईली महिला इस्राइल के किसी कद्दावर नेता की रिश्तेदार निकली। उसने अपने साथ हुई दादागिरी की कहानी अपने राजनयिक रिश्तेदार को सुनाई। उस इसराईली राजनयिक ने मामले की पूरी जानकारी इसराईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दी।
कथित जानकारी के अनुसार नेतन्याहू ने मामले की शिकायत हिन्दुस्थान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कर दी। बस फिर क्या था? नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह से मामले पर गौर करने को कहा। सूत्रों के अनुसार अमित शाह ने जब पूरी दास्तान मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से कहीं, तब जाकर मुख्यमंत्री को दंबोज की दबंगई की असलियत मालूम हुई।
नतीजा यह हुआ है कि दंबोज की नकेल कसी गई है और अब दंबोज के हाथ से एक-एक कर परियोजना हस्तांतरित की जा रही है। इस बात पर यकीन किया जाए तो कहना गलत नहीं होगा कि जल्द ही दंबोज की यह दम देकर बिल्डरों से परियोजनाओं को हथियाने की दुकान पैक हो जाएगी।


