मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

महाराष्ट्र में शिवसेना के कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर समाजवादी पार्टी के मुंबई एवं महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष तथा विधायक अबू आसिम आजमी ने दल-बदल करने वाले जनप्रतिनिधियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जनता के वोट से चुने जाने के बाद अपनी मर्जी से पार्टी बदलने वालों का पद तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।


अबू आसिम आजमी ने कहा कि आज के दौर में अधिकांश जनप्रतिनिधि, नेता और कार्यकर्ता विचारधारा के बजाय स्वार्थ और लालच से प्रेरित होकर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, जो उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल के झंडे, चुनाव चिन्ह और संगठन के समर्थन से चुनाव लड़ता है, उसे पार्टी की विचारधारा और कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर जनता का समर्थन मिलता है।
उन्होंने कहा कि पार्टी प्रत्याशी को जिताने के लिए कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत करते हैं और मतदाता भी संबंधित दल की विचारधारा को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद यदि कोई जनप्रतिनिधि दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है, तो उसका पद स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए। इसके लिए कड़े कानून की आवश्यकता है।
भाजपा पर निशाना साधते हुए आजमी ने आरोप लगाया कि सत्ता का दुरुपयोग कर अन्य दलों के नेताओं और विधायकों को लालच, दबाव और धमकी के जरिए अपनी पार्टी में शामिल कराया जाता है। उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा के साथ नहीं जाते, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इस दौरान उन्होंने अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें जेल भेजा गया, लेकिन बाद में वे निर्दोष साबित हुए।
समाजवादी पार्टी नेता ने कहा कि लोकतंत्र और जनादेश की रक्षा के लिए दल-बदल विरोधी कानून को और अधिक सख्त बनाए जाने की जरूरत है, ताकि मतदाताओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ न हो सके।


