बीएमसी के वाहन किराया ठेके में बड़े वित्तीय हेरफेर का आरोप, भुगतान रोकने और विशेष ऑडिट की मांग।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के टूरिस्ट परमिटधारक गैर-वातानुकूलित वाहनों के किराया ठेके में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। स्थायी समिति के सदस्य एवं नगरसेवक तेजिंदर सिंह तिवाना ने गुरुवार को समिति की बैठक में इस मुद्दे को उठाते हुए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच, विशेष ऑडिट तथा जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार का भुगतान रोकने की मांग की।


तिवाना ने कहा कि 5 जून 2024 से 4 जून 2026 तक के लिए स्वीकृत इस ठेके की अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासन ने इसे दिसंबर 2026 तक बढ़ाने का प्रस्ताव स्थायी समिति के समक्ष रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल निविदा के तहत सभी सात समूहों को लगभग समान प्रकार का कार्य और करीब 6 करोड़ 43 लाख 69 हजार 468 रुपये की समान ठेका राशि दी गई थी, लेकिन छह महीने की अवधि वृद्धि के लिए अलग-अलग अतिरिक्त राशि प्रस्तावित की गई है, जिससे गंभीर संदेह पैदा होता है।


उनके अनुसार, प्रस्तावित अतिरिक्त राशि में भारी अंतर दिखाई दे रहा है। ग्रुप-1 में लगभग 60 लाख रुपये, ग्रुप-2 में 70.48 लाख रुपये, ग्रुप-3 में 96.23 लाख रुपये, ग्रुप-4 में 92.60 लाख रुपये, ग्रुप-5 में 70.87 लाख रुपये, ग्रुप-6 में 99.65 लाख रुपये तथा ग्रुप-7 में 67.89 लाख रुपये का अतिरिक्त फेरबदल दर्शाया गया है।


तिवाना ने कहा कि समान प्रकृति के ठेकों के बावजूद अतिरिक्त राशि में इतना बड़ा अंतर क्यों रखा गया, इसका प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। इससे वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं और अनियमितता अथवा मनमानी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


उन्होंने मांग की कि संबंधित वाहनों का वास्तविक उपयोग किस विभाग द्वारा और कितनी अवधि तक किया गया, इसकी पूरी जानकारी स्थायी समिति के समक्ष रखी जाए। साथ ही वाहनों की लॉगशीट, यात्रा विवरण, ईंधन खपत, प्रस्तुत बिलों और किए गए भुगतानों की विस्तृत जांच कर विशेष ऑडिट कराया जाए।


तिवाना ने स्पष्ट कहा कि मुंबईकरों के कर के पैसे का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच और विशेष ऑडिट पूरा होने तक संबंधित ठेकेदारों को अतिरिक्त कार्यों समेत किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाए।


उन्होंने कहा कि समान ठेकों के लिए असमान अतिरिक्त राशि देने के पीछे के कारण सामने आने तक इस मामले को दबाया नहीं जाना चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच आवश्यक है।

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