मुंबई वार्ता संवाददाता

धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत घर खाली करने में देरी करने वाले निवासियों को अब कम ट्रांजिट किराया देने की चेतावनी दी गई है। परियोजना को लागू करने वाली विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) अडानी नवराष्ट्र डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने कहा है कि जो निवासी जानबूझकर अपने मकान खाली करने में देरी करेंगे, उन्हें निर्धारित किराये से कम राशि मिलेगी और एकमुश्त स्थानांतरण भत्ता भी नहीं दिया जाएगा।


कंपनी के अनुसार, भूतल पर रहने वाले पात्र निवासी को पहले 18,000 रुपये प्रतिमाह किराया दिया जाना था, लेकिन घर खाली करने में देरी करने पर यह राशि घटकर 15,000 रुपये प्रतिमाह रह जाएगी। वहीं, ऊपरी मंजिल के निवासी को मिलने वाला किराया 15,000 रुपये के बजाय 12,000 रुपये प्रतिमाह होगा। व्यावसायिक इकाइयों के लिए भी किराये की दर 175 रुपये प्रति वर्ग फुट से घटाकर 145 रुपये प्रति वर्ग फुट कर दी जाएगी।


कंपनी ने कहा है कि धारावी पुनर्विकास एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है और कुछ मामलों में जानबूझकर की जा रही देरी के कारण करीब 10 लाख लोगों को मिलने वाले आवास और अन्य लाभ प्रभावित नहीं होने चाहिए। कंपनी ने महाराष्ट्र झुग्गी क्षेत्र अधिनियम, 1971 की धाराओं 33 और 38 तथा डीसीपीआर 2034 के विनियम 33(10)ए का हवाला देते हुए कहा कि परियोजना में जानबूझकर बाधा डालने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में उन्हें किराये अथवा ट्रांजिट आवास जैसी सुविधाओं से भी वंचित किया जा सकता है।
धारावी के सेक्टर-6 में आने वाले गणपत नगर, मेघवाड़ी और आजाद नगर के निवासियों को घर खाली करने के नोटिस दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गणपत नगर में चार परिवारों को जबरन घर खाली कराया जा चुका है, जबकि 12 परिवार स्वेच्छा से दूसरी जगह चले गए हैं।
वहीं, कुछ स्थानीय निवासियों ने किराये की राशि को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि धारावी और आसपास के इलाकों में उपलब्ध किराये के मकानों की कीमत काफी अधिक है। एक निवासी ने बताया कि माहिम में एक कमरे और रसोई वाले मकान का किराया करीब 35,000 रुपये प्रतिमाह तक है। ऐसे में निर्धारित ट्रांजिट किराये में मुंबई के भीतर उपयुक्त आवास मिलना मुश्किल है।
धारावी पुनर्विकास योजना के तहत प्रभावित निवासियों को पुनर्वास के बाद नए घर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। हालांकि, घर खाली करने की प्रक्रिया को लेकर कुछ परिवारों की चिंताएं और विरोध सामने आया है।


