पहली बार लोन लेने वालों के लिए राहत देने वाली खबर:- क्रेडिट हिस्ट्री/सिबिल स्कोर जरूरी नहीं, सरकार ने किया स्पष्ट।

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मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

किसी भी व्यवसाई या नौकरी करने वाले एवं अन्य को बैंक से या एनबीएफसी से पहली बार ऋण लेने के लिए बैंकें उनकी पिछली हिस्ट्री या सिविल स्कोर की जांच कर ऋण देना या नहीं यह तय करती थी लेकिन अब आगे से ऐसा नहीं होगा क्योंकि वित्त मंत्रालय ने बताया है कि अगर आप पहली बार लोन ले रहे हैं और सिबिल स्कोर कमजोर है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है।

वित्त मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि पहली बार लोन लेने वालों के लिए सिबिल स्कोर जरूरी नहीं है। बैंक सिबिल स्कोर के आधार पर लोन देने से मना नहीं कर सकते हैं।

हाल ही में लोकसभा में मानसून सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्देशों के मुताबिक, बैंक या अन्य ऋणदाता केवल कम या शून्य सिबिल स्कोर के आधार पर किसी का लोन आवेदन खारिज नहीं कर सकते हैं।

चौधरी ने बताया कि 6 जनवरी 2025 को आरबीआई की ओर से जारी किए गए मास्टर डायरेक्शन में भी यह स्पष्ट किया गया है कि क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होने के कारण किसी ग्राहक को लोन देने से मना नहीं कर सकते हैं। सिबिल स्कोर ना होने की स्थिति में ग्राहक का बैकग्राउंड और पेमेंट हिस्ट्री को देखते हुए लोन दिया जा सकता है। सरकार द्वारा लोन आवेदन के लिए किसी भी तरह का न्यूनतम सिबिल स्कोर तय नहीं किया है। ऐसे में बैंक बिना सिबिल स्कोर के भी लोन दे सकते हैं।

कई बार लोग शिकायत करते हैं कि सिबिल रिपोर्ट निकालने के लिए उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। इस पर भी वित्त राज्य मंत्री चौधरी ने कहा कि कोई भी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी (CIC) ₹100 से ज्यादा शुल्क नहीं ले सकती है। इसके अलावा RBI ने यह भी निर्देश दिया है कि हर व्यक्ति को साल में एक बार अपनी पूरी क्रेडिट रिपोर्ट मुफ्त में इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में दी जाए। यह नियम 1 सितंबर 2016 से लागू है।

सिबिल स्कोर एक तीन अंकों का नंबर होता है। इस नंबर के जरिए आपकी क्रेडिट योग्यता यानी उधार चुकाने की क्षमता के बारे में जानकारी मिलती है। यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। जितना ज्यादा स्कोर, उतनी अच्छी आपकी साख मानी जाती है। इस स्कोर को CIBIL (Credit Information Bureau India Limited) तैयार करता है, जो कि देश की प्रमुख क्रेडिट इंफॉर्मेशन एजेंसियों में से एक है।

बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां लोन मंजूर करने से पहले इस स्कोर को देखकर ऋण लेने वालों की वित्तीय जिम्मेदारी का अंदाजा लगाती हैं।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया कि यह खबर यदि प्रभावी ढंग से लागू की जाती है तो ऋण लेने वालों के लिए सचमुच यह बहुत ही राहत देने वाली खबर है। देश में कई छोटे मझौले दुकानदार ऋण के लिए पहली बार जाते हैं तब बैंकों द्वारा उनके आवेदन को सिबिल स्कोर या क्रेडिट हिस्ट्री ना होने के नाते रद्द किया जाता था जो अब नहीं होगा ऐसा साहसी निर्णय लेने के लिए हम वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के आभारी है।

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