● सनातन धर्म में महत्वपूर्ण होता है ‘पंचक’
● 23 अप्रैल से 27 अप्रैल तक वैशाख का पंचक
● प्रत्येक हिंदू महीने में लगता है पांच दिवसीय पंचक
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई सनातन हिंदू धर्म में ‘पंचक’ को शुभ समय नहीं माना जाता। पंचक के पांच दिनों तक कई सावधानियां बरतनी पड़ती है, ताकि पंचक के बुरे प्रभाव से बचा जा सके। इस अवधि में कई तरह के शुभ और मांगलिक कार्य करने की भी मनाही होती है। सनातन धर्म के प्रत्येक माह में पंचक का संयोग बनता है। वैशाख (अप्रैल) माह का पंचक 23 अप्रैल से 27 अप्रैल तक रहेगा। पंचांग के अनुसार पांच दिनों के विशेष नक्षत्र संयोग को पंचक कहते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. बाबूलाल मिश्र ने बताया कि जब चंद्रमा कुंभ राशि से मीन राशि तक गोचर करता है तो पंचक का निर्माण होता है। ज्योतिष में इसे पांच महत्वपूर्ण नक्षत्रों में चंद्रमा के गुजरने का समय माना जा सकता है। ये नक्षत्र हैं, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, और रेवती। इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, या नए निर्माण कार्य से बचना चाहिए। यदि पहले से कोई कार्य चल रहा है तो उसे जारी रखा जा सकता है।
वैदिक मान्यता है कि पंचक काल में किसी भी शुभ काम का शुभ परिणाम नहीं मिलता है। हिंदू धर्म में जब किसी की मृत्यु भी पंचक के दौरान होती है, तो विशेष पूजा पाठ करके पंचक की शांति की जाती है। पंचक के पहले धनिष्ठा नक्षत्र में जरूरी ना हों, तो यात्रा को टालें। नए घर का वास्तु प्रवेश ना करें। दूसरे शतभिषा नक्षत्र में नया बिजनेस शुरू नहीं करना चाहिए। पार्टनरशिप का कोई काम शुरू करने से भी बचना चाहिए। पंचक के तीसरे पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में विवाह, नए घर का वास्तु या नई गाड़ी नहीं खरीदना चाहिए। चौथे उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, इसमें असफलता मिलती है। पंचक के पांचवें और अंतिम रेवती नक्षत्र में नया काम शुरू करने से आर्थिक हानि होने की आशंका रहती है।
इस वर्ष पड़ने वाले पंचक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशियों में गोचर करता है तो उस महीने पंचक योग का निर्माण करता है। इस वर्ष जनवरी में 3, 4, 5, 6, 7 तारीख तक पंचक रहा। जनवरी के अंत में 30, 31 जनवरी और 1, 2, 3 फरवरी तक रहा, इसके बाद 27, 28 फरवरी और 1, 2, 3 मार्च तक पंचक रहा। मार्च में 26, 27, 28, 29, 30 मार्च तक रहा। अप्रैल में 23, 24, 25, 26, 27 तक, मई में 20, 21, 22, 23, 24 तक, जून में 16, 17, 18, 19, 20 तक, जुलाई में 13, 14, 15, 16, 17, 18 तक, अगस्त में 10, 11, 12, 13, 14 तक, सितंबर में 6, 7, 8, 9, 10 तक, अक्टूबर में पंचक 3, 4, 5, 6, 7, 8 तक, नवंबर में 27, 28, 29, 30 और 1 दिसंबर तक तथा दिसंबर में 24, 25, 26, 27, 28 और 29 तरिक्ष तक पंचक रहेगा।
पंचक के प्रकार और प्रभावपंडित मिश्र ने बताया कि पंचांग के अनुसार जिस दिन (वार) को पंचक प्रारंभ होता है उसी के अनुसार इसका नामकरण क्या गया है। इसमें किसी भी शुभ कार्य को करने से बचना चाहिए।
रोग पंचक : जब पंचक की शुरुआत रविवार से होती है तो इसे रोग पंचक कहा जाता है। इस पंचक के दौरान यज्ञ या धार्मिक अनुष्ठान जैसे कार्य करने से बचना चाहिए।
राज पंचक : यदि पंचक की शुरुआत सोमवार से होती है, तो इसे राज पंचक या नृप पंचक कहा जाता है। इस समय नौकरी या नई सरकारी योजनाओं में प्रवेश करना वर्जित माना जाता है। हालांकि इसे अन्य के मुकाबले अच्छा माना जाता है।
अग्नि पंचक : मंगलवार से शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इस समय घर का निर्माण, गृह प्रवेश, या किसी प्रकार की नई संपत्ति से जुड़े कार्य नहीं किए जाने चाहिए।
चोर पंचक : शुक्रवार से शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। इस समय यात्रा करने से बचा जाता है, क्योंकि चोरी या धन हानि की आशंका रहती है।
मृत्यु पंचक : पंचक यदि शनिवार से शुरू होता है, तो इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। इस पंचक के दौरान विवाह, सगाई, और अन्य शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।


