मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष और मुंबई के पूर्व उपमहापौर राजेश शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर देश में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक नया मॉडल सुझाया है। 22 जून 2026 को भेजे गए इस पत्र में उन्होंने स्वास्थ्य खर्च की जिम्मेदारी सरकार, बीमा कंपनियों, नियोक्ताओं और मरीजों के बीच साझा करने का प्रस्ताव रखा है।


राजेश शर्मा ने अपने पत्र में कहा कि मौजूदा समय में दुनिया स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, उपलब्धता और वहनीयता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी केवल सरकार या किसी एक पक्ष पर डालना व्यावहारिक नहीं है और इससे व्यवस्था पर असंतुलित बोझ पड़ता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य प्रणाली का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक उपचार, संक्रामक और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बुजुर्गों, कैंसर, स्ट्रोक और मानसिक रोगियों की दीर्घकालिक देखभाल पर केंद्रित होना चाहिए।
पत्र में ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि वहां बढ़ते खर्च और बदलती स्वास्थ्य जरूरतों के कारण व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में भी आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी योजनाओं के बावजूद भुगतान में देरी, प्रक्रियाओं की जटिलता और पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग प्रभावित होते हैं।
■ राजेश शर्मा का प्रस्तावित हेल्थकेयर मॉडल
● 30 प्रतिशत खर्च सरकार वहन करे, साथ ही यदि भुगतान में देरी हो तो करदाताओं को चिकित्सा खर्च पर आयकर में छूट मिले।
● 30 प्रतिशत खर्च बीमा कंपनियां वहन करें और प्रत्येक नागरिक के लिए स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य किया जाए।
● 30 प्रतिशत खर्च नियोजित व्यक्तियों के मामले में उनके नियोक्ता (एम्प्लॉयर) द्वारा वहन किया जाए।
● 10 प्रतिशत खर्च मरीज, परिवार या ट्रस्ट के माध्यम से वहन किया जाए।
अस्पतालों और डॉक्टरों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत रियायत देने के लिए बाध्य करने का सुझाव भी दिया गया है।
राजेश शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से इस प्रस्ताव पर विस्तार से विचार कर आवश्यक निर्णय लेने का आग्रह किया है, ताकि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक मजबूत, पारदर्शी और टिकाऊ बनाया जा सके।
इस पत्र की प्रतिलिपि संसद की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रो. रामगोपाल यादव तथा समिति की सदस्य और सांसद शोभा बच्चन को भी भेजी गई है।


