मुंबई वार्ता संवाददाता

पुणे में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस इंस्पेक्टर वैषाली तोटेवार (49) और उनके सहयोगी संभाजी चव्हाण (47) को 28 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई शनिवार दोपहर मंगaldas रोड स्थित एक पांच सितारा होटल के सामने की गई।


ACB की टीम, जिसका नेतृत्व डिप्टी एसपी नीता मिसाल और सतीश वालके कर रहे थे, ने दोनों को एक जमीन मालिक से रिश्वत लेते समय ट्रैप किया। इस मामले में कोरेगांव पार्क पुलिस स्टेशन में दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। ACB पुणे के एसपी शिरीष सरदेशपांडे ने गिरफ्तारी की पुष्टि की।
गौरतलब है कि वैषाली तोटेवार पुणे पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में तैनात थीं। उन्हें गुरुवार शाम को इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन मिला था और मुंबई के गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) में ट्रांसफर किया गया था। शुक्रवार को उन्हें नई पोस्टिंग के लिए रिलीव भी कर दिया गया था।
जांच में सामने आया कि जिस बैग में रिश्वत दी गई थी, उसमें केवल 1.5 लाख रुपये असली नोट थे, जबकि बाकी रकम ‘चिल्ड्रन प्ले नोट्स’ यानी नकली जैसे दिखने वाले नोट थे, जिन्हें ट्रैप के लिए इस्तेमाल किया गया।
मामला एक जमीन विवाद से जुड़ा है। जमीन मालिक ने शिकायत दी थी कि उसने एक साहूकार से लिया गया कर्ज चुका दिया है, लेकिन साहूकार अब भी अतिरिक्त पैसे मांग रहा है और जमीन के गिरवी दस्तावेज वापस नहीं कर रहा। इस शिकायत की जांच तोटेवार को सौंपी गई थी।
आरोप है कि दिसंबर 2025 में तोटेवार ने जमीन मालिक से 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी और उसके पक्ष में रिपोर्ट देने का वादा किया। उस समय उन्होंने 2 लाख रुपये ले भी लिए थे। इसके बाद वह लगातार बाकी 28 लाख रुपये की मांग कर रही थीं।
ACB के मुताबिक, तोटेवार ने जमीन मालिक पर दबाव बनाया कि साहूकार उसकी जमीन बेच सकता है, इसलिए जल्द कार्रवाई करनी होगी। साथ ही, उन्होंने कथित तौर पर उसे विवाद सुलझाने के लिए साहूकार को 1 करोड़ रुपये देने की सलाह दी। जमीन मालिक ने यह रकम डिमांड ड्राफ्ट के जरिए देने का दावा किया है।
बाद में उसी साहूकार ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि जमीन मालिक ने कर्ज नहीं चुकाया है, और यह मामला भी जांच के लिए तोटेवार को ही सौंपा गया था।
ACB अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें रिश्वतखोरी, दबाव बनाना और दोनों पक्षों के साथ कथित मिलीभगत जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।


