सुरेशचंद्र राजहंस/ कॉंग्रेस प्रवक्ता/मुंबई वार्ता

देश का सबसे पुराना और अनुभवी कांग्रेस दल आज संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान में कांग्रेस की सत्ता केवल दो–तीन राज्यों तक सीमित रह गई है और महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य में भी पार्टी की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। सत्ता का स्वाद चखने के लिए अनेक नेताओं ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया। जिन लोगों को कांग्रेस ने भरपूर पद और अवसर दिए, उन्होंने भी पार्टी से किनारा कर लिया। इससे जनता में नाराज़गी है ही, साथ ही कार्यकर्ताओं में भी गहरा आक्रोश दिखाई देता है।


ऐसे कठिन समय में भी कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के प्रति निष्ठावान रहकर पार्टी के लिए निरंतर काम करने वाले कुछ ही नेता बचे हैं। इन नेताओं की संख्या भले ही कम हो, लेकिन उनका संघर्ष ईमानदार और प्रतिबद्ध है। ऐसे ही नेताओं में मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष और सांसद वर्षाताई एकनाथ गायकवाड़ का नाम अग्रणी रूप से लिया जाता है।वर्षाताई गायकवाड़ को राजनीति की सीख अपने पिता स्वर्गीय एकनाथ गायकवाड़ से मिली। एकनाथ गायकवाड़ ने जीवन भर कांग्रेस की विचारधारा को नहीं छोड़ा और उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते हुए वर्षाताई ने राजनीति और समाजसेवा की राह अपनाई। गायकवाड़ परिवार और देश के कौशल विकास के केंद्र के रूप में पहचानी जाने वाली धारावी के बीच अटूट रिश्ता रहा है।


एकनाथराव गायकवाड़ के बाद वर्षाताई ने इस रिश्ते को आगे बढ़ाया।वर्षाताई गायकवाड़ चार बार धारावी का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और वर्ष 2024 में मुंबई उत्तर–मध्य लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनी गईं। पिछले ढाई वर्षों से वे मुंबई कांग्रेस की कमान कुशलता से संभाल रही हैं। अध्यक्ष पद संभालने के बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा महासचिव प्रियंका गांधी के मार्गदर्शन में वे आक्रामक रूप से पार्टी की आवाज बुलंद कर रही हैं।चाहे संसद हो या सड़क पर संघर्ष—वर्षाताई गायकवाड़ ने आम जनता के मुद्दों को उठाकर सरकार से जवाब मांगा है। मुंबईकरों की समस्याओं को संसद में रखकर उनके समाधान का प्रयास वे निरंतर कर रही हैं। संसद में उनके कार्य की सराहना करते हुए उन्हें संसदरत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
जब कांग्रेस कठिन दौर से गुजर रही थी और एक–एक कर लोग पार्टी छोड़ रहे थे, तब राहुल गांधी ने कहा था—“जिन्हें लड़ना है वे रहें, और जिन्हें नहीं लड़ना वे पार्टी छोड़ सकते हैं।” राहुल गांधी को ऐसे ही जुझारू कार्यकर्ताओं की जरूरत है और उनके हाथ मजबूत करने के लिए वर्षाताई गायकवाड़ मुंबई में डटकर संघर्ष कर रही हैं। देश में बढ़ती तानाशाही और एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों के खिलाफ राहुल गांधी के साथ खड़ी रहकर वर्षाताई का संघर्ष जारी है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार लोकतंत्र और संविधान की अवहेलना करते हुए कठोर रवैया अपना रही है और विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। ऐसे माहौल में वर्षाताई गायकवाड़ कार्यकर्ताओं के साथ विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर लगातार आंदोलन करती रहती हैं।लोकसभा चुनाव 2024 में मुंबई में महाविकास आघाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद मुंबई महानगरपालिका चुनाव में कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी और रासप के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हुए 24 नगरसेवक निर्वाचित कराए। संख्या भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह जीत अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आज सबसे जरूरी है—राक्षसी ताकतों के खिलाफ डटकर लड़ना।पार्टी के भीतर कुछ लोग वर्षाताई गायकवाड़ की कार्यशैली की आलोचना भी करते हैं, लेकिन वे इन बातों को नजरअंदाज कर संगठन विस्तार और आम जनता के हितों की लड़ाई पर ही ध्यान केंद्रित रखती हैं। कांग्रेस की यह रणरागिणी आज सफलतापूर्वक मुंबई कांग्रेस का नेतृत्व कर रही हैं। उनके नेतृत्व में मुंबई में कांग्रेस के अच्छे दिन अवश्य आएंगे।आज वर्षाताई एकनाथ गायकवाड़ का जन्मदिन है। उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं—उनका राजनीतिक जीवन निरंतर प्रगति करे, यही कामना।


