मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय की कमी के कारण आधिकारिक क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र रखने वाले फेरीवालों पर पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने का मुद्दा सामने आया है। भाजपा नगरसेवक और विधि समिति के सदस्य तेजिंदर सिंह तिवाना ने विधि समिति की बैठक में ‘हरकत का मुद्दा’ (प्वाइंट ऑफ ऑर्डर) उठाते हुए इस मामले में तत्काल दोनों प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने की मांग की।


तिवाना ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार वर्ष 2014 के सर्वेक्षण में पात्र पाए गए 99,435 फेरीवालों के दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया बीएमसी ने पूरी की है। इसके बाद फेरीवालों में यह विश्वास बना कि वे बीएमसी द्वारा निर्धारित स्थानों पर अपना व्यवसाय कर सकेंगे और प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर केवल क्यूआर कोड होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालांकि, तिवाना के अनुसार जमीनी स्थिति अलग है। रेलवे स्टेशन, बाजार, अस्पताल और स्कूल आदि संवेदनशील स्थानों से न्यायालय के निर्देशों के तहत निर्धारित दूरी के बाहर कारोबार करने वाले फेरीवालों पर बीएमसी की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है, लेकिन पुलिस द्वारा ऐसे फेरीवालों के खिलाफ बार-बार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ये फेरीवाले न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर हैं और उनके पास बीएमसी का अधिकृत क्यूआर कोड है, तो पुलिस किस कानूनी प्रावधान के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है?
■ पुलिस के साथ तत्काल बैठक की मांग
तिवाना ने बताया कि स्थायी समिति की बैठक में बीएमसी की अतिरिक्त आयुक्त प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे ने स्पष्ट किया था कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर अन्य स्थानों पर पात्र फेरीवालों को व्यवसाय करने की अनुमति दी जाएगी।
ऐसे में पुलिस की कार्रवाई से फेरीवालों के बीच बीएमसी के संबंध में गलत संदेश जा रहा है और मनपा की छवि भी प्रभावित हो रही है। तिवाना ने मांग की कि बीएमसी प्रशासन को पुलिस प्रशासन के साथ तत्काल संयुक्त बैठक करनी चाहिए और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र और दूरी से बाहर व्यवसाय करने वाले अधिकृत फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। जब तक बीएमसी पुलिस को स्पष्ट निर्देश जारी कर कार्रवाई नहीं रोकती, तब तक उनके द्वारा उठाए गए ‘हरकत के मुद्दे’ को लंबित रखा जाए। विधि समिति की बैठक में तिवाना ने इस मांग पर अपना कड़ा रुख कायम रखा।


