बंजारा समाज को नजरअंदाज करने पर देवानंद पवार ने दिया इस्तीफ़ा।

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मुंबई वार्ता/शिव पूजन पांडेय

महाराष्ट्र में डेढ़ करोड़ बंजारा समाज होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में एक भी स्थान पर इस समाज को टिकट नहीं दिया। इस गंभीर भेदभावपूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस के पूर्व संगठन एवं प्रशासन महासचिव देवानंद पवार ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि पद से इस्तीफ़ा दे दिया है।

अपने इस्तीफ़ा पत्र में पवार ने लिखा है कि महाराष्ट्र कांग्रेस की बागडोर कुछ विशेष जाति के लोगों के हाथ में चली गई है, जिसके चलते बहुजन नेतृत्व को लगातार दरकिनार किया जा रहा है। बंजारा समाज को सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए था, लेकिन हालिया चुनावों में एक भी टिकट न मिलने से समाज की भावनाओं को ठेस पहुँची है।

पवार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के 17 लोकसभा उम्मीदवारों में से 9 मराठा–कुनबी समाज से थे, जबकि आरक्षित सीटों पर मजबूरी में टिकट दिया गया। विधानसभा चुनावों में 102 में से 51 टिकट मराठा–कुनबी समाज को मिले। बाकी सीटों पर अन्य समाजों को मौका मिला, लेकिन बंजारा, वंजारी सहित कई ओबीसी घटकों को कहीं भी टिकट नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन को प्रस्थापित नेताओं ने हाईजैक कर रखा है और बहुजन नेतृत्व उभर न सके इसके लिए लगातार उन्हें हाशिये पर धकेला जा रहा है। यवतमाल जिले में जनता ने कई नेताओं को नकारा, फिर भी वे अपने अयोग्य वारिसों को आगे कर रहे हैं। यही कारण है कि कांग्रेस अब पिछड़े और बहुजन समाज की पार्टी नहीं रह गई है, ऐसा स्पष्ट निष्कर्ष पवार ने अपने इस्तीफ़ा पत्र में व्यक्त किया है।

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