मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन करने के लिए निकले मनोज जरांगे पाटील ने अपनी बिगड़ती तबीयत को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि उनका शरीर साथ नहीं देता है तो उन्हें मुंबई मार्च के संबंध में अपना फैसला बदलना पड़ सकता है। जरांगे ने कहा कि उनकी शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है और वह ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे हैं।


जरांगे पाटील पिछले कई दिनों से अनशन पर हैं। उन्होंने चिकित्सा सहायता और पानी लेना बंद करने की बात भी कही है। उनके साथ इलाज कर रहे चिकित्सा कर्मियों के अनुसार, पिछले 48 घंटों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ी है।


जरांगे ने इससे पहले कहा था कि वह मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने के लिए मुंबई पहुंचेंगे। पुलिस ने उनके आंदोलन को अनुमति देने से इनकार किया है। इसके बावजूद वह 15 सितंबर को अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए रवाना हो गए। उनके निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार काफिला पाटोदा, श्रीगोंदा, पुणे के हडपसर और रायगढ़ के खोपोली होते हुए मुंबई पहुंचने वाला है।
अपनी तबीयत का जिक्र करते हुए जरांगे ने समर्थकों से अपील की थी कि वे उनके स्वागत के लिए भीड़ न जुटाएं। उन्होंने कहा कि यदि उनमें ताकत रही तो वह रास्ते में लोगों से बातचीत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी यह यात्रा लोगों से आखिरी मुलाकात भी हो सकती है।
इसी बीच महाराष्ट्र सरकार की ओर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जरांगे से गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में आंदोलन नहीं करने और अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। सरकार ने कानून-व्यवस्था, यातायात और गणेशोत्सव के दौरान आम नागरिकों को होने वाली संभावित परेशानी का हवाला दिया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी पहले जरांगे के मुंबई आने पर रोक लगाने से इनकार किया था और कहा था कि शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी बताई गई थी।
फिलहाल जरांगे की बिगड़ती तबीयत और मुंबई मार्च को लेकर उनके अगले फैसले पर नजर बनी हुई है। उनके स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए मार्च जारी रहेगा या उसमें बदलाव किया जाएगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।


