मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में कभी बीएमसी चुनावी घोषणापत्रों का मतलब होता था—गड्ढामुक्त सड़कें, रिसाव-रहित पानी और समय पर कचरा निस्तारण। लेकिन अब ‘24×7 जलापूर्ति’ और ‘वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर’ के बीच एक नई चार-पैरों वाली जमात भी राजनीतिक एजेंडे में शामिल हो गई है—कुत्ते।


नागरिक घोषणापत्रों में अब पेट पार्क, पेट श्मशान, डॉग फीडिंग ज़ोन जैसे वादे उसी गंभीरता से दर्ज हैं, जैसे कभी कोस्टल रोड और मेट्रो लाइनें हुआ करती थीं। राजनीतिक दल भी इस नए ‘कैनाइन वोट बैंक’ को साधने में पीछे नहीं हैं।


दक्षिण मुंबई में ओवल कूपरेज रेज़िडेंट्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित ‘डॉग वॉक एंड नेबरहुड टॉक्स’ कार्यक्रम में 30–40 पालतू पशु-प्रेमी जुटे। इस दौरान कॉमेडियन सायरस ब्रोचा और फूड क्रिटिक कुनाल विजयकर ने वार्ड 226 और 227 के उम्मीदवार मकरंद नरवेकर और डॉ. गौरवी शिवालकर नरवेकर के सामने अपनी मांगें रखीं।
मकरंद नरवेकर ने पेट-फ्रेंडली पहल और समग्र पेट पॉलिसी का वादा किया।शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और मनसे के घोषणापत्रों में भी हर वार्ड में पेट पार्क, पेट क्लिनिक, पेट क्रेच, पेट एंबुलेंस और पेट श्मशान की घोषणा की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों से जुड़े निर्देशों के मद्देनज़र पशु-प्रेमियों का मानना है कि उन्हें ऐसे कॉर्पोरेटर चाहिए जो जानवरों के प्रति संवेदनशील हों।लोगों कहना है कि डॉग पार्क, बेहतर स्वच्छता और पर्याप्त डस्टबिन से कुत्ता-प्रेमियों और विरोधी समूहों के बीच तनाव कम होगा। “यह सिर्फ बिजली, पानी या सड़कों का मुद्दा नहीं है—कुत्ते भी हमारे जीवन का हिस्सा हैं,”।
एक डॉग लवर ने सड़क के कुत्तों के प्रति बढ़ती भावनात्मक शत्रुता पर चिंता जताते हुए सह-अस्तित्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “कुत्ता-प्रेमियों को भी गैर-प्रेमियों के साथ बीच का रास्ता निकालना होगा। नागरिक अनुशासन ज़रूरी है—पालतू कुत्तों के बाद सफाई मालिकों की जिम्मेदारी है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि श्मशान जरूरी हैं, लेकिन उनके लिए पार्क और सफाई अधिक अहम हैं।हालाँकि यह मांग दक्षिण मुंबई के अभिजात वर्ग से उठती दिख सकती है और ‘फर्स्ट-वर्ल्ड प्रॉब्लम’ कहकर मज़ाक भी उड़ाया जा सकता है, लेकिन उपनगरों में भी ऐसे प्रयास दिख रहे हैं।
कांदिवली के ठाकुर विलेज में हरषा कुमारा उदुपी के नेतृत्व वाली संस्था ‘सोच सयानी’ ने ऐसा घोषणापत्र जारी किया है, जिसमें मानव और आवारा कुत्तों के शांत सह-अस्तित्व के लिए संतुलित फीडिंग ज़ोन की मांग है, ताकि क्षेत्रीय टकराव न हों।एनजीओ ने मानवीय नसबंदी अभियान, भरोसेमंद पोस्ट-ऑपरेटिव केयर, और नियमित, पूर्व-घोषित टीकाकरण ड्राइव की भी मांग की है—ताकि दो-पैरों और चार-पैरों, दोनों की सुरक्षा हो।
आगे बढ़ते हुए घोषणापत्र में क्यूआर कोड या आरएफआईडी टैग वाले फ्लोरोसेंट कॉलर का सुझाव भी है, जिससे आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और स्वास्थ्य की ट्रैकिंग हो सके।घोषणापत्र में समर्पित पेट पार्क को भी प्रमुख स्थान मिला है—ऐसी जगह जहाँ पालतू खुलकर दौड़ सकें और मालिक पार्किंग की समस्या पर चर्चा कर सकें।
कुछ वार्डों में अब लगता है कि पेट पार्क का प्रस्ताव ढूँढना पार्किंग और ट्रैफिक समाधान से आसान हो गया है।शहरी लोकतंत्र की इस कहानी में अब भौंक भी मतपेटी तक पहुँचने लगी है। आखिर शहर की राजनीति में निष्ठा मायने रखती है—और निष्ठा में कुत्तों का मुकाबला कौन कर सकता है?


