बीएमसी ने मेयर विकास निधि के लिए रिकॉर्ड 250 करोड़ रुपये को दी मंजूरी।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की सामान्य सभा की शुक्रवार को हुई बैठक में मेयर विकास निधि के लिए रिकॉर्ड 250 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। यह बीएमसी के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी राशि है। इससे पहले यह निधि 100 करोड़ से 200 करोड़ रुपये के बीच रहती थी।
यह निधि महापौर की सिफारिश पर नगरसेवकों के बीच वितरित की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, मेयर के विवेकाधीन फंड में बढ़ोतरी ठोस कचरा प्रबंधन, सड़क कंक्रीटीकरण और पुल विभाग जैसी प्रमुख योजनाओं से धन पुनर्विनियोजित कर की गई है।


शुक्रवार की बैठक में पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) को भी मंजूरी दे दी गई, जिसके बाद मुंबईभर में विभिन्न विकास कार्यों के लिए बजट जारी होने का रास्ता साफ हो गया है। इनमें आधारभूत ढांचा उन्नयन, स्वच्छता परियोजनाएं और वार्ड स्तर के विकास कार्य शामिल हैं। राजस्व व्यय को बीते महीने ही मंजूरी मिल चुकी थी।


हालांकि, स्थायी समिति द्वारा पहले स्वीकृत 800 करोड़ रुपये के विकास निधि प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। आरोप था कि नगरसेवकों के बीच निधि का वितरण समान रूप से नहीं किया गया।
शुरुआत में सभी नगरसेवकों को लगभग 2.25 करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया गया था, लेकिन कुछ वार्डों को 5 करोड़ से 20 करोड़ रुपये तक आवंटित किए जाने की खबरों के बाद विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी विरोध शुरू हो गया।


स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे और बीएमसी सदन के नेता गणेश खनकर, दोनों भाजपा से जुड़े हैं, और उनके वार्डों को 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई थी। वहीं भाजपा विधायक अमित साटम के विधानसभा क्षेत्र के नगरसेवकों को भी लगभग 6 करोड़ रुपये प्रति वार्ड दिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद पक्षपात के आरोप तेज हो गए।


विवाद बढ़ने के बाद आवंटन में संशोधन किया गया। स्थायी समिति की विकास निधि से 54 करोड़ रुपये कम कर उन्हें सफाई कर्मचारियों के आवास और कल्याण जैसी नागरिक योजनाओं में स्थानांतरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रभाकर शिंदे और गणेश खनकर के आवंटन से 15-15 करोड़ रुपये घटाए गए।


इसके अलावा, अमित साटम द्वारा आवंटन में संतुलन लाने की मांग किए जाने के बाद उनके विधानसभा क्षेत्र के नगरसेवकों की अतिरिक्त राशि में भी लगभग 3.75 करोड़ रुपये प्रति नगरसेवक की कटौती की गई, जिससे सभी वार्डों के लिए आवंटन को लगभग 2.25 करोड़ रुपये के समान स्तर पर लाया गया।

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