मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड ने बेस्ट कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर भाजपा महायुति सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की निष्क्रियता और गलत नीतियों के कारण मुंबई की दूसरी जीवनरेखा मानी जाने वाली बेस्ट सेवा ठप हो गई, जिससे लाखों मुंबईकरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।


वर्षा गायकवाड ने कहा कि जब बड़ी संख्या में लोग काम पर जाने के लिए घरों से निकले, तब उन्हें घंटों सड़कों पर बसों का इंतजार करना पड़ा। यह केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि भाजपा महायुति सरकार की विफलता का परिणाम है। उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर कर्मचारी संगठनों के साथ सकारात्मक बातचीत करे और लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेकर बेस्ट सेवा को सामान्य करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से बेस्ट कर्मचारियों की मांगों को लंबित रखा गया, जबकि सरकार ने ठेकेदारी और निजीकरण को बढ़ावा दिया। कर्मचारियों की चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज किया गया और जब स्थिति बिगड़ गई तो अब सरकार मेस्मा जैसे कानून का सहारा ले रही है।
कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को पहले से ही हड़ताल की संभावना की जानकारी थी, तो लाखों मुंबईकरों को परेशान होने की नौबत आने तक सरकार क्या कर रही थी? समय रहते बातचीत कर समाधान निकालने के बजाय अब सरकार अदालत और कानून के पीछे छिपने की कोशिश कर रही है।
वर्षा गायकवाड ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी प्राथमिकता सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बचाना है या फिर निजीकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाना। उन्होंने पूछा कि बेस्ट सेवा के पूरी तरह ठप होने जैसी स्थिति के लिए आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महायुति सरकार को मुंबईकरों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है और केवल बड़ी-बड़ी घोषणाओं के जरिए जनता को गुमराह किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार मुंबईकरों के धैर्य की और परीक्षा न ले तथा जल्द से जल्द इस संकट का समाधान निकाले।


