श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

बहुत लोगों के त्याग और बलिदान से भारतीय जनता पार्टी जैसी राष्ट्रीय पार्टी अस्तित्व में आई है। ऐसे ही बलिदानी लोगों में भाजपा के पूर्व भारतीय जनता युवा मोर्चा मुंबई अध्यक्ष मोहित कंबोज का भी नाम आता है।


वर्षो की तपस्या, कड़ी मेहनत और आम जनता की सेवा करने के बाद मोहित कंबोज ने एक अंग्रेजी अखबार के माध्यम से घोषित किया है कि वे राजनीति से सन्यास ले रहे हैं।
आम जनता को घर प्रदान करने के लिए मुंबई के महान समाजसेवी बिल्डरो को जो भी परेशानी हो रही थी उसका निदान कर मोहित कंबोज जनता की सेवा में लगातार कार्यरत थे। इस काम के लिए वे हमेशा मुंबई महानगर पालिका आयुक्त से लेकर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस तक को चैन से बैठने नहीं देते थे। यह बात जगजाहिर है। और सेवा भाव इस कदर का था कि मजाल है कभी किसी बिल्डर से एक रुपए की भी दलाली ली हो।


वर्ष 2002 में वाराणसी से मुंबई आए मोहित कंबोज तत्कालीन गृहराज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में जनसेवा कार्यो में उतरे । बहुत कोशिश की कि उन्हें कॉंग्रेस में कोई पद और चुनावी टिकट मिल जाए। लेकिन हाय रे कॉंग्रेस की राजनीति, इतने बड़े समाजसेवी को कॉंग्रेसी समझ नहीं पाए। आखिरकार उस समय मोहित कंबोज ने समाजवादी पार्टी जॉइन कर अपनी जनसेवा को विस्तार देने की सोची। कथित तौर पर मोहित कंबोज अपने समर्थकों समेत उत्तर प्रदेश के लखनऊ सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलने पहुंचे। लेकिन… हाय रे , ये राजनीतिज्ञ। मुलायम सिंह ने मोहित कंबोज से मिलना भी उचित नहीं समझा। आखिर अच्छे आदमी को कौन देखना चाहता है ?
फ़िलहाल काफी राजनीतिक पापड बेलने के बाद वर्ष 2013 में मोहित कंबोज को भाजपा ने गले लगाते हुए मुंबई भाजपा उपाध्यक्ष पद पर पदासीन किया। इतना ही नहीं उन्हें 2014 में ढींडोशि विधानसभा से चुनावी टिकट भी दिया। लेकिन हाय री … पब्लिक … इतने बड़े समाजसेवी को जनता ने हराकर वापस बांद्रा भेज दिया।
अब तक भाजपा पार्टी के वरिष्ठ नेता ,मोहित कंबोज की जनसेवा को पहचान चुके थे…. इस हार को दरकिनार कर पार्टी ने मोहित कंबोज को भारतीय जनता युवा मोर्चा का मुंबई अध्यक्ष बना दिया। फिर क्या था मौका मिलते ही मोहित कंबोज ने अपनी जनसेवा क्षमता का ऐसा परिचय दिया कि जब शिवसेना टूटी तो उनके बागी विधायकों के साथ याद है कौन था… मोहित कंबोज।
वर्ष 2024 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद तो मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, मोहित कंबोज की जनसेवा का इस कदर मुरीद हुए कि उनकी बाहों में झूलते नजर आए। मुंबई वार्ता ने उस समय मुख्यमंत्री को बाहों में झुलाने की निंदा करते हुए लेख लिखा था… लेकिन उस समय मुंबई वार्ता को मोहित कंबोज के विशाल जनसेवा कृत्य की जानकारी नहीं थी।
अब मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस के सबसे नजदीकी, सभी बिल्डरो के तारनहार ने अचानक राजनीति से बिदाई लेने की घोषणा कर अपने ‘त्याग’ का जिस प्रकार से अंग्रेजी अखबार में घोषणा की है… वह तारीफ के काबिल है।
मोहित कंबोज ने अंग्रेजी अखबार के माध्यम से कहा कि, ” मैं अपने व्यापार की ओर अधिक ध्यान देना चाहता हूँ… मैं भाजपा का सदस्य रहूँगा लेकिन अब ऐक्टिव पालिटिक्स से रिटायर हो रहा हूँ।”
वाह…. श्री श्री 1008 बाबा कंबोजानंद की जय हो….
वैसे राजनीतिज्ञ लोगों को इस त्याग की कदर ही कहाँ है ? वो तो आरोप लगा रहे हैं कि सरकार की ओर से एक बहुत बड़ी रिडेवलपमेंट परियोजना मोहित को दी जाने वाली है। उस समय आरोप लग सकता है कि भाजपा ने favouritism किया और अपनी पार्टी के समाजसेवी को टेंडर दे दिया। बस…. शायद इसी गंदी राजनीति से तंग आकर ही बाबा ने त्याग की सारी सीमाएं लांघते हुए ऐक्टिव पालिटिक्स से विदाई ली होगी।
हालांकि मुंबई वार्ता की ओर से उक्त आरोप के बारे में मोहित कंबोज के मोबाइल और whats app पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन इतने बड़े “त्यागी” को किसी के बोलने से क्या फर्क़ पड़ता है… ‘त्यागी’ मोहित कंबोज ने अपना पक्ष नहीं रखा।



राजनीति से जुड़े लोगों को आइना दिखाया है