■ ‘वोट चोरी’ पकड़े जाने से भाजपा में बौखलाहट, मोदी-शाह को सपने में भी राहुल गांधी नजर आते हैं; वोट चोरों को सजा मिलकर रहेगी।
■ बाबासाहेब आंबेडकर के प्रति भाजपा और देवेंद्र फडणवीस का प्रेम ‘पूतना मौसी’ जैसा, संविधान बदलने की बात तो भाजपा नेताओं ने ही की थी।
मुंबई वार्ता संवाददाता

कांग्रेस की दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली से केंद्र की मोदी सरकार बौखला गई है। इस रैली की ताकत से घबराकर भाजपा अब देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ’ रैलियां कर रही है। लेकिन लोकतंत्र और संविधान की असली विरोधी भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ही हैं। भाजपा के मुंह में संविधान और मन में मनुस्मृति है। ऐसे में भाजपा की संविधान और लोकतंत्र बचाने की मुहिम ‘चोर की उल्टी चिल्लाहट’ जैसी है। यह तीखा हमला महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया है।


मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा संविधान और लोकतंत्र के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने पर पलटवार करते हुए सपकाल ने कहा कि भाजपा और आरएसएस को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान कभी स्वीकार नहीं रहा। भाजपा के कई नेता खुलेआम संविधान बदलने की बात कर चुके हैं। इसके बावजूद फडणवीस कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं, जो हास्यास्पद है।
सपकाल ने कहा कि भाजपा को सत्ता में आए 13 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी उसके नेता जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी पर आरोप लगाने में ही लगे हैं। भाजपा यह बताने को तैयार नहीं है कि उसने अपने कार्यकाल में देश के लिए क्या किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के चुनाव में वोटों की चोरी करके मोदी और फडणवीस की सरकार सत्ता में आई है। वोट चोरी का मामला उजागर होने से भाजपा में घबराहट है। सत्ता जाने और उसके बाद कार्रवाई होने के डर से भाजपा नेताओं की नींद उड़ गई है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मोदी-शाह सरकार चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार की मदद से 13 करोड़ नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने का प्रयास कर रही है। भाजपा घुसपैठियों का मुद्दा उठाती है, लेकिन कितने घुसपैठियों को पकड़ा गया, इसका कोई आंकड़ा नहीं देती। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो घुसपैठियों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक करें। घुसपैठियों के नाम पर आम नागरिकों का मतदान का अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए।
सपकाल ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन चुनाव के माध्यम से होता है और राजनीतिक दल इसी उद्देश्य से काम करते हैं। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस को सत्ता परिवर्तन से इतना डर क्यों लग रहा है?उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित कर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं में भाजपा और संघ से जुड़े लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं। चुनाव आयोग सत्ताधारी दल को नोटिस तक नहीं भेजता, जबकि न्यायपालिका में सरकार के हस्तक्षेप को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी सार्वजनिक रूप से चिंता जता चुके हैं।
सपकाल ने कहा कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान 400 पार का नारा संविधान में बदलाव करने के उद्देश्य से दिया था। भाजपा के कई नेताओं ने सार्वजनिक सभाओं में सत्ता में आने पर संविधान बदलने की बात कही थी। अब मुख्यमंत्री फडणवीस इन बयानों को सुविधानुसार भूल रहे हैं।राहुल गांधी के हाथ में लाल रंग का संविधान भाजपा को क्यों खटकता है?राहुल गांधी के हाथ में रहने वाले लाल कवर के संविधान पर भाजपा की आपत्ति को लेकर सपकाल ने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा लाल रंग से इतना भयभीत क्यों है? राहुल गांधी तो डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान को ही जनता के सामने रखते हैं। भाजपा की बेचैनी का कारण यह है कि उसकी कथित वोट चोरी उजागर हो गई है और अब उसके नेताओं के पैरों तले जमीन खिसक रही है।
सपकाल ने कहा कि भाजपा नेता पहले राहुल गांधी को हल्के में लेते थे और सवाल उठाते थे कि राहुल गांधी कौन हैं, लेकिन अब उनकी राजनीतिक चुनौती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी परेशान नजर आते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मोदी और शाह को सोते-जागते राहुल गांधी ही दिखाई देते हैं। भाजपा की यह बौखलाहट इस बात का संकेत है कि विपक्ष की आवाज और लोकतंत्र की लड़ाई का असर सत्ता पक्ष पर पड़ रहा है।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दोहराया कि कथित वोट चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी ही चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।


