भारतीय रेल में पहली बार हुआ प्राचार्य सम्मेलन।

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■ प्रशिक्षण की गुणवत्ता और आधुनिकता पर विशेष बल.

मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

भारतीय रेल ने अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण को बेहतर और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में पहली बार मल्टी डिसिप्लिनरी ज़ोनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (MDZTI) के प्राचार्यों का सम्मेलन ट्रैफिक निदेशालय के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। वर्तमान में भारतीय रेल के कुल 14 MDZTI संस्थान फील्ड स्टाफ को प्रशिक्षण देते हैं। यहाँ नए भर्ती कर्मचारियों को शुरुआती कोर्स और कार्यरत स्टाफ को समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जाती है।

सम्मेलन में प्रमुख चर्चा केस स्टडीज़ के उपयोग पर हुई, जिनके माध्यम से ट्रेन संचालन और सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहतर तरीके से समझाया जा सके। साथ ही प्रशिक्षण को अधिक संवादात्मक और रोचक बनाने के लिए सिमुलेटर के उपयोग को बढ़ाने पर विचार किया गया। प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नियमित फीडबैक संग्रह की व्यवस्था करने का भी निर्णय लिया गया। सम्मेलन में विभिन्न एमडीज़ेटीआई संस्थानों द्वारा तैयार किए गए प्रशिक्षण और लेक्चर वीडियो को एक साझा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया, जिससे कर्मचारियों को एक ही स्थान पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री प्राप्त हो सके।

सम्मेलन के अंतर्गत एमडीज़ेटीआई प्राचार्यों को दिल्ली मेट्रो रेल अकादमी का दौरा भी कराया गया। जहाँ उन्होंने मेट्रो रेल प्रशिक्षण पद्धतियों का अवलोकन किया। इस अवसर पर कैब, बोगी एवं सिग्नलिंग सिस्टम्स के सिमुलेटर, ऑटोमैटिक दरवाज़े का सिस्टम और आपातकालीन निकासी प्रक्रिया से संबंधित प्रशिक्षण विधियों को विस्तार से प्रदर्शित किया गया।यह सम्मेलन भारतीय रेल की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिसके अंतर्गत प्रशिक्षण ढाँचे को और अधिक आधुनिक, व्यवहारिक एवं उच्च गुणवत्ता वाला बनाया जा रहा है। इससे स्टाफ की दक्षता में वृद्धि होने के साथ-साथ सुरक्षित एवं सुचारु रेल संचालन भी सुनिश्चित होगा।

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