मुंबई वार्ता संवाददाता

● मत्स्य उत्पादन बढ़ाना और पारदर्शिता लाना सरकार की भूमिका- मत्स्य व्यवसाय मंत्री नितेश राणे


राज्य की सभी मछुआरा संस्थाओं को समान रूप से तालाब आवंटित करने के लिए और तालाब आवंटन करते समय संस्थाओं के सदस्य संख्या के आधार पर तालाब क्षेत्र निर्धारित करने की नीति बनाई जाए, ऐसे निर्देश आज राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने दिए।
वहीं, राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और मत्स्य व्यवसाय में पारदर्शिता लाने की सरकार की भूमिका है, ऐसा मत्स्य व्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने कहा।
मंत्रालय में जलाशय मत्स्य व्यवसाय सहकारी संस्थाओं की समस्याओं को लेकर बैठक आयोजित की गई। इस दौरान मंत्री श्री. बावनकुळे और मंत्री नीतेश राणे ने संबोधित किया। बैठक में मत्स्य व्यवसाय सचिव डॉ. एन. रामास्वामी, मत्स्य व्यवसाय आयुक्त किशोर तावड़े, मत्स्य व्यवसाय उद्योग निगम की प्रबंध निदेशक अनीता मेश्राम सहित मछुआरा संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मंत्री बावनकुळे ने कहा कि जिन संस्थाओं के सदस्य 1 से 25 तक हैं, उन्हें 50 हेक्टेयर तक के तालाब आवंटित किए जाएं और जैसे-जैसे सदस्य संख्या बढ़ती जाए, तालाब का क्षेत्रफल भी बढ़ाया जाए। इस आवंटन की एक मानक प्रक्रिया तैयार कर इसकी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्रीय अधिकारियों को सौंपी जाए। मत्स्य व्यवसाय को बढ़ाने और उद्योग में गुणवत्ता लाने के लिए परियोजना प्रबंधन सलाहकार (PMC) नियुक्त किए जाएं। राज्य के छह राजस्व विभागों के लिए छह PMC नियुक्त किए जाएं, जिससे मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी। विभाग को मछुआरा संस्थाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए और उच्च गुणवत्ता वाली मछली बीज उपलब्ध कराने की योजना बनानी चाहिए। अच्छी गुणवत्ता वाली मछली बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बजटीय प्रावधान किया जाए, ऐसी भी उन्होंने निर्देश दिए।
मंत्री बावनकुळे ने कहा कि राज्य के सभी तालाबों का नियंत्रण मत्स्य व्यवसाय विभाग के पास होना चाहिए और इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जाए। साथ ही, जिला योजना निधि का कम से कम 10% मत्स्य व्यवसाय के लिए आरक्षित रखने का प्रस्ताव भी तैयार किया जाए और इन दोनों प्रस्तावों को मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाए। मत्स्य व्यवसाय को कृषि उद्योग का दर्जा दिया गया है, इसलिए इस व्यवसाय के लिए व्यापक योजना बनाई जाए, ऐसे भी निर्देश मंत्री बावनकुळे ने दिए।
● मछुआरों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत – मंत्री नीतेश राणे
मंत्री नीतेश राणे ने कहा कि राज्य के मछुआरे पहले से ही सक्षम हैं, और उन्हें और अधिक सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के लिए इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता लाना आवश्यक है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि मछुआरों के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे, और मछुआरा संस्थाओं को यह विश्वास रखना चाहिए कि उनका कोई नुकसान नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि कुछ बाहरी और फर्जी लोग इस व्यवसाय में प्रवेश कर गए हैं, जिससे कुछ अनियमितताएँ हो रही हैं। इस पर नियंत्रण रखना मछुआरों के हित में आवश्यक है। विभाग इस दिशा में प्रयास कर रहा है, जिससे मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी और मछुआरों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
मंत्री नीतेश राणे ने यह भी घोषणा की कि राज्य में सभी तालाबों और संपूर्ण मत्स्य व्यवसाय विभाग का डिजिटलीकरण करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी मछुआरा संस्था के साथ अन्याय नहीं होगा। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से संस्थाओं को ही लाभ होगा, क्योंकि बड़े क्षेत्र के तालाबों के लिए अधिकतम संस्थाएँ पात्र होंगी और इससे अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णय मछुआरों के हित में हैं और संस्थाओं को इसमें सहयोग करना चाहिए, ऐसा भी मंत्री श्री. राणे ने कहा।
मत्स्य व्यवसाय विभाग के सचिव डॉ. रामास्वामी ने कहा कि पूरे राज्य के लिए समान नीति होनी चाहिए और मत्स्य व्यवसाय को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त निधि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इस बैठक में 2023 के सरकार के निर्णय पर लगी रोक हटाए जाने से मछुआरों को होने वाले लाभों की डिजिटल प्रस्तुति के माध्यम से जानकारी दी गई।


