मराठी सीखने की समयसीमा बढ़ी, मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों पर RTO की कार्रवाई जारी रहेगी।

Date:

मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के अनिवार्य ज्ञान को लेकर चल रहे विवाद के बीच सरकार ने मराठी सीखने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि जो चालक मराठी सीखना चाहते हैं और उन्हें अतिरिक्त समय की जरूरत है, उन्हें समय दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी के साथ भाषा के आधार पर अन्याय करना नहीं है।


यह मामला उस समय और गरमा गया जब मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के एक वर्ग ने मराठी भाषा की अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन और हड़ताल शुरू कर दी। चालकों का कहना है कि वे मराठी सीखने के लिए तैयार हैं, लेकिन RTO जांच के दौरान पूछे जा रहे कुछ सवाल सरकारी प्रशिक्षण में सिखाई गई सामग्री से बाहर के हैं।

■ RTO की जांच जारी रहेगी


परिवहन विभाग ने साफ किया है कि भाषा संबंधी नियम को लागू करने के लिए RTO की जांच और कार्रवाई जारी रहेगी। 20 अगस्त से शुरू हुई जांच में चालकों की मराठी में कामचलाऊ बातचीत करने की क्षमता परखी जा रही है। शुरुआती दौर में महाराष्ट्र भर में हजारों चालकों की जांच की गई और नियमों का पालन नहीं करने वालों को नोटिस दिए गए।


रिपोर्ट के अनुसार, 20 अगस्त तक 8,217 वाणिज्यिक यात्री वाहन चालकों की जांच की गई थी। इनमें मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में 3,995 चालकों की जांच हुई, जिनमें 604 चालकों के पास आवश्यक कामचलाऊ मराठी ज्ञान नहीं पाया गया। राज्य के अन्य हिस्सों में 4,222 चालकों की जांच में 664 को नोटिस जारी किए गए।


■ नोटिस के बाद मिलेगा एक महीने का समय


जिन चालकों को मराठी भाषा के ज्ञान में कमी के कारण नोटिस दिया जा रहा है, उन्हें निर्धारित स्तर की मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय दिया जा रहा है। यदि चालक इस अवधि में नियम का पालन नहीं करता है तो उसके बैज को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। लगातार उल्लंघन की स्थिति में आगे लाइसेंस या परमिट से संबंधित कार्रवाई भी हो सकती है।

■ तीन बार बढ़ चुकी है समयसीमा


मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मराठी सीखने की समयसीमा पहले ही तीन बार बढ़ाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार हिंदी भाषी ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी का विशेषज्ञ बनाने की कोशिश नहीं कर रही है, बल्कि यात्रियों से संवाद करने के लिए आवश्यक कामचलाऊ मराठी ज्ञान जरूरी है।


परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी कहा है कि मराठी का कार्यसाधक ज्ञान यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। परिवहन विभाग के अनुसार, राज्य में एक लाख से अधिक गैर-मराठी भाषी चालकों ने मराठी प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण कराया था और उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए निजी शिक्षकों की भी मदद ली गई।


■ चालकों के विरोध के बीच सरकार का रुख स्पष्ट


मुंबई में ऑटो और टैक्सी सेवाओं पर इस विवाद का असर भी देखने को मिला है। चालकों के एक वर्ग ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान उन्हें परेशान किया जा रहा है और परीक्षा में ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं जो प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थे। वहीं सरकार का कहना है कि केवल कामकाज के लिए जरूरी मराठी ज्ञान की जांच की जा रही है और किसी के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा।


सरकार ने एक ओर जरूरतमंद चालकों को मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त अवसर देने का संकेत दिया है, वहीं दूसरी ओर RTO की जांच और नियमों का पालन कराने की कार्रवाई जारी रखने का भी फैसला किया है। इससे मुंबई के ऑटो-टैक्सी चालकों के बीच भाषा नियम को लेकर जारी विवाद फिलहाल खत्म होने के बजाय आगे भी जारी रहने के आसार हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

प्रमुख खबरे

More like this
Related

अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बुजुर्ग कारोबारी से 75 लाख की वसूली।

मुंबई वार्ता संवाददाता नागपाड़ा इलाके में एक बुजुर्ग...

तिलक नगर के एसआरवी अस्पताल में रोबोटिक तकनीक से जॉइंट रिप्लेसमेंट की सुविधा शुरू।

■ पूर्व विधायक मंगेश कुडाळकर ने किया अत्याधुनिक तकनीक...

CINTAA विवाद पर पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने रखा संगठन का आधिकारिक पक्ष।

■ आरोपों को किया खारिज, कहा—एकतरफा बयानों से संस्था...