■ ३० घंटे बाद, शव 14 किलोमीटर दूर मिला।
मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

ग्रामीणों के अधिकारों के लिए लड़ रहे बुलढाणा के एक सामाजिक कार्यकर्ता को अपनी जान देनी पड़ी। बुलढाणा के विनोद पवार प्रशासन की देरी और उदासीनता का शिकार हुए और स्वतंत्रता दिवस पर हुई इस घटना ने ग्रामीणों पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया।प्रशासन की उदासीनता के कारण बेवजह मारे गए सामाजिक कार्यकर्ता का परिवार आक्रोशित है।


बुलढाणा जिले के अडोल खुर्द गाँव के युवा सामाजिक कार्यकर्ता विनोद पाटिल ने कई वर्षों से लंबित ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों के लिए १५ अगस्त को जल विसर्जन विरोध की चेतावनी दी थी। विनोद पाटिल ग्रामीणों की सड़क, पानी और घरों जैसी बुनियादी समस्याओं के लिए जीगाँव परियोजना के पास जल विसर्जन विरोध में सबसे आगे थे। उन्होंने बयान में यह भी उल्लेख किया कि उन्हें तैरना नहीं आता। लेकिन प्रशासन ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया और जल विसर्जन आंदोलन के दौरान पूर्णा नदी में उतरते समय विनोद पवार पानी की तेज धारा में बह गए। एनडीआरएफ की टीम ने तलाश शुरू की, ३० घंटे बाद, १६ अगस्त को विनोद पवार का शव मलकापुर के पास मिला।


विनोद पवार की बेटियों ने आरोप लगाया कि जब विनोद पाटिल पर अत्याचार हो रहे थे, तब प्रशासन के पास उनकी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। स्वतंत्रता दिवस के दिन हुई इस घटना ने पूरे गाँव को झकझोर कर रख दिया है। गाँव के अधिकारों के लिए लड़ने वाले विनोद पवार के परिवार और गाँव पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।


