रवीन्द्र मिश्रा | मुंबई वार्ता

वाराणसी से मुंबई प्रतिदिन चलने वाली महानगरी एक्सप्रेस में पीने के पानी की खुलेआम कालाबाजारी का मामला सामने आया है। रेलवे द्वारा निर्धारित रेल नीर के बजाय लोकल ब्रांड का पानी यात्रियों को मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है, जिससे यात्रियों में भारी नाराजगी है।


24 दिसंबर को PNR नंबर 282-5086343 पर यात्रा कर रहे एक यात्री ने बताया कि रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सुविधा के लिए रेल नीर की कीमत 15 रुपये से घटाकर 14 रुपये कर दी है, इसके बावजूद ट्रेन में वेंडर रेल नीर की बोतल 20 रुपये में बेच रहे हैं। इतना ही नहीं, Elvish नामक पानी भी 20 रुपये में बेचा जा रहा है।
यात्री के अनुसार, यह Elvish पानी मिर्जापुर स्टेशन पर वातानुकूलित कोच B-7 में लोड किया गया था। 24 दिसंबर को ट्रेन के S-1 स्लीपर कोच में शौचालय के पास पश्चिम छोर का दरवाजा बंद कर एक बड़े नीले ड्रम में यह पानी सप्लाई के लिए रखा गया था। बताया गया कि इस पानी का निर्माण वाराणसी स्थित शिवगंगा इंफ्रास्ट्रक्चर के बालाजी बेवरेजेस द्वारा किया जाता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि रेलवे द्वारा यात्रियों को सप्लाई किए जा रहे इस पानी की बोतलों पर कोई मूल्य अंकित नहीं है, जबकि रेलवे के नियमों के अनुसार यात्रियों के लिए उपलब्ध हर वस्तु पर उसका मूल्य लिखा होना अनिवार्य है। रेलवे स्वयं यात्रियों से अपील करता रहा है कि जिस सामान पर मूल्य अंकित न हो, उसका भुगतान न करें। इसके बावजूद यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर वेंडर मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
इतना ही नहीं, ट्रेन में चाय, पानी और भोजन बेचने वाले अधिकांश वेंडरों के गले में आई-कार्ड तक नहीं होता। जानकारों के मुताबिक, इसी तरह नियमों के उल्लंघन के चलते पश्चिम रेलवे के बोरीवली स्टेशन पर एक आहार गृह को बंद किया गया था।जब S-1 कोच में पानी बेच रहे वेंडर से यात्री ने पूछा कि उसे यहां पानी रखने की अनुमति किसने दी, तो उसने जवाब दिया कि “हमारा मालिक सीएसटी में है”।



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