महाराष्ट्र मंत्रिमंडल बना . फिर अनाथ हुआ उत्तर भारतीय समाज !

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श्रीश उपाध्याय/ मुंबई वार्ता

आज महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले सभी 39 मंत्रियों का नाम घोषित कर दिया गया है. उनके नाम इस प्रकार हैं:-

(कॅबिनेट मंत्री )1. चंद्रशेखर बावनकुळे 2. राधाकृष्ण विखे पाटील 3. हसन मुश्रीफ 4. चंद्रकांत पाटील 5. गिरीश महाजन 6. गुलाराव पाटील 7. गणेश नाईक 8. दादा भुसे 9. संजय राठोड 10. धनंजय मुंढे 11. मंगळप्रभात लोढा 12. उदय सावंत 13. जयकुमार रावल14. पंकजा मुंडे 15. अतुल सावे 16. अशोक उईके 17. शंभूराजे देसाई 18. आशिष शेलार 19. दत्तात्रय भरणे 20. आदिती तटकरे 21. शिवेंद्रसिंहराजे भोसले 22. माणिकराव कोकाटे 23. जयकुमार गोरे 24. नरहरी झिरवळ 25. संजय सावकारे 26. संजय शिरसाठ 27. प्रताप सरनाईक 28. भरत गोगावले 29.मकरंद जाधव पाटील30. नितेश राणे 31. आकाश फुंडकर 32. बाबासाहेब पाटील 33. प्रकाश आबिटकर राज्यमंत्री 1.माधुरी मिसाळ 2.आशिष जयस्वाल 3.पंकज भोयर 4.मेघना बोर्डीकर 5.इंद्रनिल नाईक 6.योगेश कदम —

-इस मंत्रिमंडल में, मुस्लिम, मराठा, मारवाडी,ओबीसी समेत सभी समाज के विधायकों को जगह दी गई लेकिन आश्चर्य की बात है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावो में उत्तर भारतीयों के चरण धोकर पीने को तैयार दिख रही भारतीय जनता पार्टी ने मंत्रिमंडल में एक भी उत्तर भारतीय को जगह नहीं दी है.

पूरे महाराष्ट्र की जनसंख्या की बात करें तो उत्तर भारतीयों की जनसंख्या लगभग 10 प्रतिशत से अधिक है. अगर सिर्फ मुंबई की जनसंख्या की बात करें तो भी मुंबई की कुल सवा करोड़ की आबादी में उत्तर भारतीयों की संख्या 60 लाख के करीब है. इसके बावजूद भाजपा ने एक भी उत्तर भारतीय को मंत्री पद के लायक ही नहीं समझा है.भाजपा का मराठीवाद स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है.

कहने को तो भाजपा में राजहंस सिंह, विद्या ठाकुर, स्नेहा दुबे, संजय उपाध्याय नामक चार उत्तर भारतीय विधायक है. जिसमें से राजहंस सिंह और विद्या ठाकुर का राजनीतिक सफर भी काफी लंबा है. संजय उपाध्याय काफी लंबे समय से पार्टी में सक्रिय रहे हैं. गत कई साल से संजय उपाध्याय मुंबई भाजपा महामंत्री के रूप में भी सक्रिय रहे हैं. लेकिन इनमें से कोई भी मंत्री बनने के लायक भाजपा वरिष्ठ नेतृत्व को नहीं लगता.

भाजपा को मंगल प्रभात लोढा मे उत्तर भारतीयों का नेतृत्व करने की क्षमता दिख रही है. क्योंकि मुंबई भाजपा में उत्तर भारतीयों की औकात मुसलामानों से भी गई गुजरी है. मुसलामानों ने तो फिर भी उद्धव बाला साहब ठाकरे की पार्टी उबाठा को मदद कर अपना अस्तित्व बरकरार रखा है. एक ही सही पर सरकार तक उनकी बात पहुंचाने वाला कोई तो है. लेकिन महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय अनाथ हो गया है.

यह सच है कि हिन्दुत्व की बात करते हुए भाजपा ने किसी भी मुस्लिम नेतृत्व को पार्टी में ऊपर नहीं आने दिया. लेकिन क्या यही हाल मुंबई और महाराष्ट्र के उत्तर भारतीयों का नहीं हो रहा है ?अब मंत्री लोढा को उत्तर भारतीयों की समस्या दूर करने की जवाबदारी थोपी गई है. कुछ दिन बाद वाचमैंनो के भरोसे भीड़ इकट्ठा करने वाली उत्तर भारतीयों की तथाकथित एक संस्था उनका स्वागत करेगी. दर्शाया जायेगा कि उत्तर भारतीयों को मंजूर है कि लोढा ( एक मारवाडी बिल्डर ) उनका अच्छे से नेतृत्व करेंगे. हालाकि समाज, हमेशा की तरह दबा कुचला अपनी हर छोटी- बड़ी जरूरतों के लिए सहायता की आस में दर दर भटकता फिरेगा.

उत्तर भारतीय समाज में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है और भाजपा को इसका खामियाजा आगामी मुंबई महानगर पालिका चुनाव में भुगतना पड़ सकता है.

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