श्रीश उपाध्याय | मुंबई वार्ता

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के लिए गुरुवार को हुए मतदान के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब मतदान के बाद मतदाताओं की उंगलियों पर लगाई जाने वाली स्याही को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए।


शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने आरोप लगाया कि इस बार इस्तेमाल की गई स्याही तय मानकों के अनुरूप नहीं है और वह कुछ ही समय में मिट जा रही है, जिससे दोबारा मतदान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
■ राज ठाकरे का तीखा हमला
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने मतदान के बाद मीडिया से बातचीत में चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि, “मतदान की प्रक्रिया की सबसे अहम कड़ी स्याही होती है। अगर वही ठीक से काम नहीं कर रही है, तो पूरे चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।”


राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि कई मतदाताओं की उंगलियों से स्याही कुछ ही घंटों में हल्की पड़ गई या पूरी तरह मिट गई, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो गया है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले की तत्काल जांच की मांग की।
■ उबाठा गुट ने भी जताई आपत्ति
शिवसेना (उबाठा) गुट के नेताओं ने भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने का दावा किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्हें अलग-अलग महानगरपालिकाओं से स्याही से जुड़ी शिकायतें मिली हैं। उनका आरोप है कि यदि स्याही लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है, तो इसका दुरुपयोग हो सकता है।
■ मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का जवाब
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने नागपुर में मतदान करने के बाद मीडिया से बातचीत में इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि,“चुनाव आयोग द्वारा तय मानकों के अनुसार ही स्याही का इस्तेमाल किया गया है। विपक्ष बेवजह शंका पैदा कर रहा है। चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी को कोई ठोस शिकायत है, तो वह चुनाव आयोग के समक्ष प्रमाण के साथ अपनी बात रखे।
■ चुनाव आयोग की स्थिति
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग को कुछ स्थानों से स्याही को लेकर शिकायतें मिली हैं, जिनकी प्राथमिक स्तर पर जांच की जा रही है। आयोग का कहना है कि अब तक किसी भी जगह से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
■ राजनीतिक सरगर्मी तेज
मनपा चुनाव वैसे ही बेहद अहम माने जा रहे हैं, खासकर मुंबई महानगरपालिका समेत अन्य बड़े शहरों को लेकर। ऐसे में स्याही को लेकर उठा विवाद चुनावी नतीजों से पहले राजनीतिक तापमान और बढ़ा सकता है।


