मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार राज्य की पोस्टमार्टम (शव परीक्षण) व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब दुनिया में प्रचलित अत्याधुनिक ‘नॉन-इनवेसिव’ (बिना चीर-फाड़) पोस्टमार्टम तकनीक लागू की जाएगी। इस नई प्रणाली की शुरुआत सबसे पहले मुंबई के जे.जे. अस्पताल और केईएम अस्पताल में की जाएगी। इससे अधिकांश मामलों में शव को बिना चीर-फाड़ किए ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी, जिससे समय और मानव संसाधन दोनों की बचत होगी।


यह जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में भाजपा विधायक चित्रा वाघ द्वारा शवविच्छेदन केंद्रों की बदहाल स्थिति और रिक्त पदों को लेकर उठाए गए तारांकित प्रश्न के जवाब में दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के शवविच्छेदन केंद्रों में जल्द से जल्द आवश्यक कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी। हालांकि, तकनीकी कारणों से 90 दिनों के भीतर सभी रिक्त पद भरना संभव नहीं है, लेकिन सरकार समयबद्ध अभियान चलाकर इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि ‘नॉन-इनवेसिव पोस्टमार्टम’ तकनीक पेट स्कैन जैसी आधुनिक इमेजिंग प्रणाली पर आधारित होगी। इस तकनीक के जरिए करीब 90 प्रतिशत पोस्टमार्टम बिना चीर-फाड़ के किए जा सकेंगे, जबकि केवल 10 प्रतिशत जटिल या आपराधिक मामलों में ही पारंपरिक पोस्टमार्टम की आवश्यकता पड़ेगी। इससे जांच प्रक्रिया अधिक तेज, वैज्ञानिक और प्रभावी बनेगी।
विधानसभा में विधायक डॉ. प्रज्ञा सातव ने कलमनुरी उपजिला अस्पताल में ऑटोप्सी सर्जन और अन्य रिक्त पदों का मुद्दा उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने वहां जल्द आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति का आश्वासन दिया।
सरकार के अनुसार, मई 2026 तक राज्य में 10,905 पोस्टमार्टम किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 533 पोस्टमार्टम केंद्रों की आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा कर सभी कमियों को दूर किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन गंभीर मेडिको-लीगल मामलों में विसरा (Viscera) सुरक्षित रखा जाता है, उनकी जांच को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही प्रयोगशालाओं में जांच प्रक्रिया को तेज और अधिक सटीक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा, ताकि रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराई जा सके।


