मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में वर्षों से बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) के रह रही इमारतों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार की ‘अभय योजना’ के तहत बिना OC वाली इमारतों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट देने का प्रस्ताव बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में मंजूर कर लिया गया। विपक्ष की ओर से प्रस्ताव को अधिक जानकारी के लिए फिर से स्थगित करने की मांग की गई, लेकिन समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने इसे खारिज करते हुए मूल प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।


इस फैसले के बाद 1991 से 17 नवंबर 2016 के बीच बनीं और अब तक OC से वंचित सभी प्रकार की इमारतों के लिए OC प्राप्त करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे इन इमारतों को बीएमसी का पानी कनेक्शन, संपत्ति के स्वामित्व, फ्लैट की खरीद-बिक्री और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में आ रही समस्याओं से राहत मिलेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभय योजना के तहत आवेदन करने और निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली पात्र इमारतों को OC जारी किया जाएगा। पहले प्रस्ताव में 50 प्रतिशत से अधिक आवासीय उपयोग और 80 वर्गमीटर तक के क्षेत्रफल की शर्त थी, लेकिन अब 80 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली पात्र इमारतों को भी योजना का लाभ मिल सकेगा।
बैठक के दौरान शिवसेना के यशोधन फणसे, कांग्रेस के अशरफ आजमी और मनसे के यशवंत किल्लेदार ने प्रस्ताव में कई खामियां बताते हुए सरकार से संशोधित प्रस्ताव लाने की मांग की। विपक्ष ने यह भी मांग की कि जिन बिल्डरों, आर्किटेक्ट और सलाहकारों की लापरवाही के कारण इमारतों को OC नहीं मिला और निवासी परेशान हुए, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए।
इस पर प्रशासन ने आश्वासन दिया कि OC लेने में लापरवाही करने वाले डेवलपर्स, आर्किटेक्ट और सलाहकारों की सूची तैयार कर बीएमसी की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी, ताकि नागरिक ऐसे लोगों के प्रति सतर्क रह सकें।
गौरतलब है कि मुंबई में बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें हैं जिन्हें अब तक OC नहीं मिला है। इसके कारण हजारों फ्लैट मालिकों को संपत्ति के स्वामित्व, बिक्री, बैंक ऋण और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार का मानना है कि ‘अभय योजना’ इन समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।


