मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के स्थानांतरण (शिफ्टिंग) के लिए नई नीति घोषित की है। नई नीति के तहत जर्जर और खतरनाक इमारत, परियोजना प्रभावित क्षेत्र, अपर्याप्त भौतिक सुविधाएं, किरायानामा समाप्त होना या किराए की इमारत से खुद की इमारत में स्थानांतरण जैसी परिस्थितियों में स्कूलों को स्थानांतरण की अनुमति दी जाएगी।


नई गाइडलाइन के अनुसार प्राथमिक स्कूलों को मूल स्थान से अधिकतम 5 किलोमीटर, माध्यमिक स्कूलों को 10 किलोमीटर और उच्च माध्यमिक स्कूलों को 20 किलोमीटर की सीमा के भीतर ही स्थानांतरित किया जा सकेगा।
राज्य में वर्तमान में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं, अनुदानित, गैर-अनुदानित और स्वयं वित्तपोषित मिलाकर एक लाख से अधिक स्कूल संचालित हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि छात्र संख्या बढ़ने से सुविधाएं कम पड़ने या बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भी स्थानांतरण को मंजूरी दी जा सकेगी।
■ अनुदानित स्कूलों के लिए विशेष शर्त
सरकार ने निर्देश दिया है कि अनुदानित और आंशिक अनुदानित स्कूलों के मामले में अतिरिक्त शिक्षकों का समायोजन पूरा किए बिना स्थानांतरण प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा जा सकेगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि स्थानांतरण के बाद विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो।
■ स्थानांतरण के लिए अनिवार्य दस्तावेज
नई नीति के तहत स्थानांतरण मंजूरी से पहले संबंधित सक्षम प्राधिकरण का प्रमाणपत्र, स्थानीय स्वराज्य संस्था का अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC), सार्वजनिक निर्माण विभाग से दूरी प्रमाणपत्र तथा आरटीई कानून के अनुसार सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने का प्रमाण अनिवार्य किया गया है।
■ कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को अनुमति नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 20 से कम छात्रों वाली प्राथमिक स्कूलों तथा 40 से कम छात्रों वाली माध्यमिक स्कूलों के स्थानांतरण प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा।


