मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र स्थावर संपदा विनियामक प्राधिकरण (महारेरा) के पास वर्ष 2017 से पंजीकृत राज्य के करीब चार हजार रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के बारे में कोई भी अद्यतन जानकारी उपलब्ध नहीं होने का गंभीर मामला सामने आया है। इस पर महारेरा ने राज्य की 445 नियोजन प्राधिकरणों और एजेंसियों को पत्र भेजकर इन प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जानकारी मांगी है।महारेरा यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि ये प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं या अभी किस स्थिति में हैं।


अब तक राज्य में 10 हजार से अधिक हाउसिंग प्रोजेक्ट्स समय पर अवधि-विस्तार (एक्सटेंशन) न लेने के कारण व्यपगत (लैप्स) हो चुके हैं। संबंधित डेवलपर्स को आमतौर पर एक वर्ष की अवधि-विस्तार दी जाती है, उसके बाद ही प्रोजेक्ट्स को नियमित माना जाता है।हालांकि, इनमें से 3,977 प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जो व्यपगत होने के बावजूद उनके बारे में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, महारेरा को यह भी स्पष्ट नहीं है कि ये प्रोजेक्ट्स वास्तव में चल रहे हैं या बंद हो चुके हैं।नियमों के अनुसार, महारेरा में पंजीकरण के बाद प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी को समय-समय पर वेबसाइट पर अपडेट करना अनिवार्य है। लेकिन 2017 से अब तक इन चार हजार प्रोजेक्ट्स में कोई भी अपडेट नहीं किया गया, जिससे इनकी वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल सका।अब महारेरा ने संबंधित नियोजन प्राधिकरणों से इन प्रोजेक्ट्स में कितने मकान बिक्री के लिए हैं, इसकी जानकारी भी मांगी है। साथ ही आईओडी (इंटिमेशन ऑफ डिसअप्रूवल), निर्माण प्रारंभ प्रमाणपत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
महारेरा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जानकारी मिलने के बाद दोषी डेवलपर्स के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


