मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के सांताक्रूज़ (पश्चिम) इलाके में चल रहे एक झुग्गी पुनर्वसन (SRA) प्रोजेक्ट में प्रशासन और न्यायपालिका को गुमराह कर अतिरिक्त लाभ हासिल करने की कोशिश करने वाली मुमताज़ एच. खोजा को अदालतों से बड़ा झटका लगा है। मुंबई उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में इस मामले को ‘मडलिंग ऑफ फैक्ट्स’ (तथ्यों की तोड़-मरोड़) और ‘मटेरियल सप्रेशन’ (महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना) करार दिया है।


हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर तथ्यात्मक स्थिति को गलत तरीके से पेश किया और आवश्यक जानकारियों को छुपाया, जिससे अदालत और प्रशासन को भ्रमित करने का प्रयास किया गया। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए कड़ी टिप्पणी की।उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ मुमताज़ खोजा ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।


सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि अदालतें झुग्गी पुनर्वसन योजनाओं में किसी भी तरह की धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने को बर्दाश्त नहीं करेंगी।
न्यायालयों के इस रुख को झुग्गी पुनर्वसन परियोजनाओं में पारदर्शिता और नियमों के सख्त पालन की दिशा में एक अहम संदेश माना जा रहा है। इससे उन लोगों को भी चेतावनी मिली है जो गलत जानकारी देकर या तथ्यों को छुपाकर अवैध लाभ लेने की कोशिश करते हैं।


