मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र की वरिष्ठ नौकरशाह मनीषा पाटनकर म्हैस्कर के एक बयान ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया कि महायुति सरकार के एक मंत्री ने अपने विभाग का नेतृत्व किसी महिला अधिकारी को देने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण उन्हें उस पद से वंचित कर दिया गया।


म्हैस्कर, जो वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) हैं, ने यह खुलासा महिला सिविल सेवकों के एक साहित्यिक सम्मेलन के स्मारिका में प्रकाशित इंटरव्यू में किया। यह घटना वर्ष 2023 की बताई गई है, जब राज्य में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में सरकार बनी थी।
उन्होंने कहा, “मेरे 33 साल के करियर में ऐसा सिर्फ एक बार हुआ। 2023 में सरकार बनने के बाद पोस्टिंग हो रही थी। एक नेता ने साफ कहा कि वह नहीं चाहता कि उसके विभाग को कोई महिला चलाए, और मुझे उस पद से हटा दिया गया।”
हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र उनके प्रति हमेशा निष्पक्ष रहा है और यह सिर्फ एक अपवाद था। उन्होंने राज्य को सामाजिक सुधारों की परंपरा वाला प्रगतिशील राज्य बताया, जहां आम जनता के लिए अधिकारी का लिंग मायने नहीं रखता।
म्हैस्कर ने यह भी कहा कि आज के समय में नौकरशाही में लैंगिक भेदभाव काफी हद तक कम हो चुका है, लेकिन महिलाओं को अभी भी खुद को ज्यादा साबित करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यदि कोई पुरुष अधिकारी अक्षम होता है तो उसकी व्यक्तिगत आलोचना होती है, जबकि महिला अधिकारी की गलती को सभी महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में पहले भी महिला अधिकारियों ने गृह, वित्त, ऊर्जा और आवास जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। साथ ही राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है।
इस बयान के बाद महायुति सरकार की महिला सशक्तिकरण की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।


